Bhopal News : स्मार्ट मीटर के खिलाफ बिजली क्रांति, भोपाल में 6 अक्टूबर को होगा बड़ा प्रदर्शन

Bank Employees Protest

Bhopal News : भोपाल। मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं का स्मार्ट मीटर के खिलाफ आक्रोश चरम पर पहुँच गया है। मध्यप्रदेश बिजली उपभोक्ता एसोसिएशन (एमपीसीए) के बैनर तले 6 अक्टूबर 2025 को भोपाल के डॉ. अंबेडकर पार्क में हजारों उपभोक्ता इकट्ठा होकर ‘बिजली बचाओ’ महाप्रदर्शन करेंगे। यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन 11 प्रमुख मांगों पर केंद्रित होगा, जिसमें हर घर को 200 यूनिट मुफ्त बिजली और बिजली दरों में कमी शामिल है।

प्रदर्शन की तैयारी के बीच मध्य प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग (MPERC) ने स्मार्ट मीटर लगाने की अनिवार्यता को तीन वर्ष बढ़ाकर 31 मार्च 2028 तक कर दिया। पूर्व, मध्य और पश्चिमी क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की याचिका पर यह निर्णय लिया गया। यह कदम उपभोक्ताओं को अस्थायी राहत देगा, लेकिन एमपीसीए का कहना है कि स्मार्ट मीटर लूट का मीटर है, और विरोध जारी रहेगा।

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बढ़ते बिलों से त्रस्त उपभोक्ता

एमपीसीए की प्रदेश संयोजक रचना अग्रवाल और लोकेश शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि स्मार्ट मीटर से बिल 10 गुना बढ़ गए हैं। भोपाल में 700-800 रुपये के बिल 10-29 हजार हो गए। ग्वालियर में एक कमरे के घर का बिल 5 हजार और महीने में दो बिल आने की शिकायतें हैं। गुना, सीहोर, विदिशा, सतना, इंदौर, देवास, दमोह, जबलपुर में भी यही समस्या। अग्रवाल ने कहा, “यह विरोध राजनीतिक नहीं, दैनिक आय का सवाल है।”

ये हैं 11 मांगें :
हर घर को 200 यूनिट बिजली मुफ्त
बिजली दरों में कमी
स्मार्ट मीटर हटाना
प्री-पेड मीटर की बजाय पोस्ट-पेड

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बिलिंग में पारदर्शिता
बिजली चोरी रोकने के लिए वैकल्पिक उपाय
किसानों को सस्ती बिजली
सब्सिडी बढ़ाना
मीटर रीडिंग में सुधार
उपभोक्ता शिकायत तंत्र मजबूत
डिस्कॉम प्रबंधन में बदलाव

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6 अक्टूबर को सुबह 10 बजे अंबेडकर पार्क में इकट्ठा होकर शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। मुदित भटनागर, सतीश ओझा, आरती शर्मा जैसे पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे।

अनिवार्यता 31 मार्च 2028 तक बढ़ाई

डिस्कॉम ने आयोग से अनिवार्यता बढ़ाने की मांग की, तर्क दिया कि स्मार्ट मीटर एक वृहद प्रणाली है—मीटर, नेटवर्किंग, डेटा मैनेजमेंट, बिलिंग और सर्वर। प्रशिक्षित कर्मियों की कमी है। आयोग ने स्वीकार किया और समयसीमा बढ़ाई। राहत: शहरी क्षेत्र में नए कनेक्शन पर सामान्य मीटर, ग्रामीण में नॉन-स्मार्ट। पुराने खराब मीटर 2028 तक बदलने का विकल्प।

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1.37 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य है। पहले चरण में 38.47 लाख स्वीकृत, 99.22 लाख दूसरे में। 12.56 लाख लगे। अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मंडलोई ने कहा, “51 हजार प्रशिक्षित स्टाफ भर्ती, एक साल लगेगा।”

बिल 10 गुना

उपभोक्ता कहते हैं कि स्मार्ट मीटर से बिल अनाप-शनाप आ रहे। भोपाल में 700-800 का बिल 10-29 हजार। ग्वालियर में दो बिल। दमोह में विरोध, कर्मचारियों को भगाया। राजस्थान में भी 1.42 करोड़ मीटर पर विवाद। सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत दी, लेकिन एमपीसीए का कहना है कि मीटर लूट का साधन है। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा। आशा है कि मांगें सुनी जाएंगी।

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