Bageshwar Baba on Muslims ‘No Entry’ at Navratri Garba Festival 2025 : मध्य प्रदेश। प्रदेश में नवरात्रि की धूम के बीच गरबा आयोजनों पर ‘मुसलमानों की नो एंट्री’ का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। अब इस बहस में बागेश्वर धाम के विवादास्पद पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एंट्री मार ली है। छतरपुर जिले के राजनगर विधानसभा क्षेत्र के लवकुशनगर में मां बम्बर बैनी माता के दर्शन के दौरान बाबा ने गरबा संचालकों से सख्त सलाह दी – पंडालों के प्रवेश द्वार पर गोमूत्र रखा जाए, ताकि ‘सच्चे भक्त’ ही अंदर घुस सकें।
गोमूत्र से ‘पवित्र’ प्रवेश
लवकुशनगर के मां बम्बर बैनी माता मंदिर में दर्शन के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने गरबा आयोजकों को संबोधित करते हुए कहा, “जब हम उनके (मुस्लिमों) हज यात्रा में नहीं जाते, तो उन्हें भी हमारे माता की आराधना और गरबा में नहीं आना चाहिए। ये हमारा पवित्र त्योहार है, इसे अपवित्र न होने दें।”
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उन्होंने गोमूत्र को हिंदू परंपरा का पवित्र तत्व बताते हुए अपील की कि हर पंडाल के गेट पर इसका प्रबंध हो, ताकि केवल ‘सच्चे हिंदू’ ही अंदर प्रवेश कर सकें। बाबा के साथ भाजपा विधायक अरविंद पटैरिया भी मौजूद थे, जिन्होंने इस अपील का समर्थन किया। शास्त्री का यह बयान 22 सितंबर 2025 को दिया गया, जो नवरात्रि की शुरुआत के ठीक समय पर आया, जब पूरे राज्य में गरबा का जोर है।
बता दें कि, यह बयान मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर और दमोह जैसे जिलों में चल रहे गरबा विवादों के बीच आया है, जहां हिंदू संगठनों ने तिलक लगाना, कलावा बांधना और आधार कार्ड चेक करने की गाइडलाइंस जारी की हैं। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल जैसे संगठनों का दावा है कि ये कदम ‘लव जिहाद’ और ‘गरबा जिहाद’ रोकने के लिए जरूरी हैं।
भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने हाल ही में चिंता जताई थी कि कुछ लोग हिंदू महिलाओं को लुभाने के लिए तिलक-कलावा का इस्तेमाल कर गरबा में घुस सकते हैं। इंदौर में भाजपा जिला अध्यक्ष ने तो गोमूत्र को ‘प्रसाद’ के रूप में बांटने का सुझाव दिया था, जिसे राज्य भाजपा प्रमुख वीडी शर्मा ने ‘व्यक्तिगत राय’ बता कर किनारे कर दिया। लेकिन शास्त्री का बयान इस विवाद को नई ऊंचाई दे रहा है, जहां अब धार्मिक प्रतीकों के साथ-साथ ‘पवित्र तरल’ का मुद्दा जोड़ दिया गया है।