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Sehore Kubereshwar Dham : भगदड़ में मां को खोने वाले परिवार का दर्द, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल! बेटी बोली- ‘CM हेल्पलाइन से भी मदद नहीं’

Sehore Kubereshwar Dham Stampede

Sehore Kubereshwar Dham Stampede : सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में कुबेरेश्वर धाम में अगस्त महीने में हुए रुद्राक्ष वितरण कार्यक्रम के दौरान मची भगदड़ ने न सिर्फ दो महिलाओं की जिंदगी छीन ली, बल्कि कई परिवारों को अनाथ कर दिया। अब फिरोजाबाद के उस टूटे परिवार की पुकार गूंज रही है, जिसकी बेटी मानसी गुप्ता मां संगीता गुप्ता को खो चुकी है। शुक्रवार को एसपी कार्यालय पहुंचे वे न्याय की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि, आर्थिक मदद तो दूर, घटना की जिम्मेदारी कौन लेगा?

ये है पूरा मामला

बात अगस्त 2025 की है, जब कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के कुबेरेश्वर धाम में रुद्राक्ष वितरण का भव्य कार्यक्रम शुरू हुआ। हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े, लेकिन व्यवस्था फेल हो गई। प्रांगण में अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ में दो महिलाएं कुचलकर दब गईं।

इनमें से एक उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद की संगीता गुप्ता थीं, जो 5 अगस्त को धाम पहुंची थीं। एक तरफ भक्ति की लहर, दूसरी तरफ मौत का सैलाब – संगीता जी की बेटी मानसी गुप्ता आज भी उस दिन को याद कर कांप जाती हैं।

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मानसी ने बताया, “मां रुद्राक्ष लेने गई थीं, लेकिन लाइन में धक्का-मुक्की से सब बिगड़ गया। मां दब गईं, और जब तक कुछ समझ आया, देर हो चुकी थी। हमारे परिवार की कमान मां ही संभालती थीं, अब सब बिखर गया।” परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कमजोर थी और अब बिना सहारे के वे त्रस्त हैं।

6 अगस्त को धाम में कांवड़ यात्रा का आयोजन हुआ, जहां देशभर से लाखों भक्त पहुंचे। लेकिन ट्रैफिक जाम, भीड़ का उफान और अव्यवस्था ने तीन दिनों में सात जिंदगियां लील लीं। श्रद्धालु घंटों सड़कों पर अटके रहे, गर्मी और थकान ने कईयों की सांसें थम दीं।

फिरोजाबाद परिवार ने शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपी। जिसमें कहा गया है कि, आर्थिक सहायता दो और आयोजन समिति पर कठोर कार्रवाई करो।

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मृतक महिला के परिजन का आरोप है कि डेढ़ महीना बीत गया, लेकिन न कोई मुआवजा मिला, न दोषियों पर शिकंजा कसा गया। मानसी ने कहा, “हमने सीएम हेल्पलाइन पर भी गुहार लगाई, लेकिन जवाब शून्य। क्या भगवान के नाम पर ये अन्याय बर्दाश्त करें?”

मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया। 6 अगस्त को ही आयोग ने सीहोर एसपी और कलेक्टर से 15 दिनों में पूरी जांच रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट में भीड़ प्रबंधन, घायलों के इलाज और मृतकों को दी गई सहायता का ब्योरा चाहिए था। लेकिन पीड़ित परिवार का दावा है कि समय बीत गया, रिपोर्ट आई या नहीं – कोई फर्क नहीं पड़ा। टीआई सुनील मेहर ने बताया, “मौत के मामले में मर्ग कायम है, बयान दर्ज हो रहे हैं। जांच चल रही है।

 

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