Farmers Tractor Rallyin Ujjain : मध्य प्रदेश। उज्जैन की सड़कों पर आज ट्रैक्टरों का काफिला और किसानों का जोश हिलोरे मार रहा है। हजारों किसान अपनी जमीन बचाने के लिए एकजुट होकर लैंड पुलिंग योजना के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। 15 सूत्रीय मांगों के लिए भारतीय किसान संघ (मालवा प्रांत) के बैनर तले यह आंदोलन एक लाख बीघा जमीन को बचाने की जंग बन गया है।
सोमवार को उज्जैन की सड़कों पर 2000 ट्रैक्टर-ट्रालियों और 5000 से ज्यादा किसानों ने डेरा डाल लिया। अनुमान है कि यह संख्या जल्द ही 10 हजार तक पहुंच जाएगी। सिंहस्थ क्षेत्र के 17 गांवों सहित अन्य क्षेत्रों के किसान इस रैली में शामिल हैं, जो आगर रोड के सामाजिक न्याय परिसर से शुरू होकर चामुंडा माता चौराहा, तरणताल और कोठी क्षेत्र के कलेक्टर कार्यालय तक जाएगी।
यहां सभा होगी और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। पुलिस ने भारी भीड़ को देखते हुए प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी है, और यातायात डायवर्जन की व्यवस्था की है। लेकिन किसानों का जोश थमने का नाम नहीं ले रहा।
भाजपा के पूर्व मंत्री पारस जैन ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया, हालांकि वे कुछ देर बाद लौट गए। फिर भी, उनका समर्थन इस रैली को राजनीतिक ताकत दे गया। किसान नेताओं ने साफ कर दिया है कि अगर मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो गांवों से दूध और सब्जी की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी। यह चेतावनी सरकार के लिए खतरे की घंटी है।
लैंड पुलिंग किसानों की जमीन पर खतरा?
भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “सरकार जल्दबाजी में गलती कर रही है। वह किसानों की जमीन छीनकर स्थायी स्ट्रक्चर बनाना चाहती है। सिंहस्थ हजारों सालों से चल रहा है, तब ये सरकारें नहीं थीं। सुविधाएं बनाएं, लेकिन अस्थायी। ताकि 11 साल किसान जमीन का उपयोग करें और एक साल सिंहस्थ को दें।” मिश्र ने साफ कहा कि संतों को साधना के लिए खुला मैदान चाहिए, न कि कंक्रीट के जंगल।
राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन ने आगे कहा कि, “भोपाल में 1500-1800 प्रभावित किसानों की बजाय प्रशासन उनसे बात कर रहा है, जो कुछ साल बाद यहां से चले जाएंगे। किसान हजारों साल से जमीन दे रहा है। हमें मुआवजा चाहिए और सिंहस्थ की सुविधाएं ऐसी हों कि किसान और श्रद्धालु दोनों का भला हो। केंद्र और राज्य सरकार हमसे बात करें, हम क्यों करें? जमीन हमारी है, सिंहस्थ हम चलाते हैं।” उन्होंने न्यायपालिका से भी इस मुद्दे पर संज्ञान लेने की अपील की।
किसानों की मांगें सिर्फ लैंड पुलिंग तक सीमित नहीं हैं। उनकी 15 मांगें इस प्रकार हैं:
1. उज्जैन सिंहस्थ क्षेत्र में लैंड पुलिंग पूरी तरह बंद हो।
2. गरोठ रोड पर दोनों तरफ सर्विस रोड बनाए जाएं।
3. सेवरखेड़ी, सिलारखेड़ी में गाइडलाइन बढ़ाई जाए।
4. सोयाबीन का MSP 5328 रुपये + 672 रुपये बोनस, यानी 6000 रुपये प्रति क्विंटल हो।
5. नर्मदा पाइपलाइन और अन्य नदियों से सूखाग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था बढ़ाई जाए।
6. मुख्यमंत्री ट्रांसफार्मर अनुदान योजना पुनः शुरू हो।
7. राजस्व रिकॉर्ड सुधार के लिए पटवारी के गांव में बैठने के दिन तय हों।
8. आवारा पशुओं (रोजड़ा, सुअर, बंदर, हिरण) से फसल बचाने की ठोस योजना बने।
9. आगामी फसल के लिए खाद की उपलब्धता बढ़े।
10.फसल बीमा में सैटेलाइट सर्वे की जगह क्रॉस कटिंग के आधार पर क्लेम हो।
11. पीला मोजक से खराब सोयाबीन का मुआवजा दिया जाए।
12. मध्य प्रदेश में लैंड पुलिंग कानून समाप्त हो।
13. जमीन अधिग्रहण में 2012 की गाइडलाइन पर 20% वार्षिक वृद्धि के साथ 4 गुना मुआवजा हो।
14. विकास के नाम पर 4-6 लाख प्रति बीघा में जमीन न छीनी जाए; विक्रम नॉलेज सिटी में 4 गुना मुआवजा हो।
15. जावरा-उज्जैन रोड नॉर्मल फोरलेन हो, दोनों तरफ सर्विस रोड हों।
रैली के दौरान यातायात व्यवस्था
रैली सामाजिक न्याय परिसर से शुरू होकर आगर रोड, चामुंडा माता चौराहा, तरणताल, और कोठी क्षेत्र के कलेक्टर कार्यालय तक जाएगी। सभा में मोहिनी मोहन मिश्र, कमल सिंह आंजना, भरत सिंह बेस जैसे नेता संबोधित करेंगे। पुलिस ने यातायात डायवर्जन की व्यवस्था की है:
मंडी चौराहा से चामुंडा माता मंदिर: ट्रैफिक इंद्रा नगर, ईदगाह, जाट धर्मशाला, अंकपात मार्ग, नई सड़क, इंदौर गेट होकर हरिफाटक जाएगा।
जाट धर्मशाला से: पिपली नाका, जूना सोमवारिया, शंकराचार्य, जंतर-मंतर, कचरा घर से हरिफाटक।
मंडी चौराहा से: पंचकोशी मार्ग, हीरा मिल कुंड, पाटीदार अस्पताल ब्रिज, सांदीपनि चौराहा।
देवास गेट: इंदौर गेट, गदा पुलिया, हरिफाटक-टी से बाहर।
कोयला फाटक: चामुंडा माता मंदिर की ओर ट्रैफिक जीरो पॉइंट ब्रिज की ओर जाएगा।
रैली समाप्ति : वाहन विक्रमनगर मार्ग से पाइप फैक्ट्री होकर बाहर जाएंगे।