हाइलाइट्स
- सिंगरौली के धिरौली कोल ब्लॉक मुद्दे पर बजट सत्र में जमकर हंगामा।
- कांग्रेस ने विधानसभा समिति से जांच की मांग करते हुए सदन से वॉकआउट किया।
- 8 गांवों की जमीन अधिग्रहण से 12,998 परिवारों के प्रभावित होने का दावा।
- मुआवजा वितरण में गड़बड़ी और बाहरी लोगों को भुगतान के आरोप।
- हंगामे के चलते विधानसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित।
MP Budget 2026 : भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के नौवें दिन सिंगरौली जिले के धिरौली स्थित कोल ब्लॉक को लेकर सदन में तीखी नोकझोंक और हंगामा देखने को मिला।
प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और पूरे मामले की विधानसभा समिति से जांच कराने की मांग की।
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नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सिंगरौली में कोल ब्लॉक के लिए बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे हजारों आदिवासी परिवार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुआवजा वितरण में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और पात्र लोगों को उनका पूरा हक नहीं मिला है।
8 गांवों की जमीन अधिग्रहित, 12,998 परिवार प्रभावित
सदन में जानकारी देते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि कोल ब्लॉक परियोजना के लिए 8 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है। कलेक्टर की सूची के अनुसार इससे 12,998 परिवार प्रभावित हैं।
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उन्होंने आरोप लगाया कि कई आदिवासी परिवारों को अब तक पूरा मुआवजा नहीं मिला, जबकि कुछ ऐसे लोगों को भी मुआवजा दिया गया है, जिनका जमीन से कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और पक्षपात बताया।
अधिकारियों के परिजनों को मुआवजा मिलने का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने सदन में कुछ नामों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक थाना प्रभारी की पत्नी को लगभग 15 लाख 94 हजार रुपये और एक यातायात प्रभारी की पत्नी को 14 लाख 42 हजार रुपये का मुआवजा दिया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रभावित आदिवासी परिवार अपने हक के लिए भटक रहे हैं, तब अधिकारियों के परिजनों को किस आधार पर मुआवजा दिया गया। इसी आधार पर कांग्रेस ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विधानसभा समिति गठित करने की मांग रखी।
कांग्रेस अड़ी रही, सदन से किया वॉकआउट
अध्यक्ष द्वारा सरकार की ओर से जांच के आश्वासन के बावजूद कांग्रेस विधायक विधानसभा समिति से जांच कराने की मांग पर अड़े रहे।
कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए नारेबाजी की और अंततः विरोध स्वरूप सदन की कार्यवाही से वॉकआउट कर दिया।
हंगामे की वजह से विधानसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। वॉकआउट के बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन परिसर में भी नारेबाजी की।
सरकार का जवाब: जांच और कार्रवाई का आश्वासन
सरकार की ओर से मंत्रियों ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि अब तक 1,552 प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जा चुका है। सरकार का दावा है कि प्रत्येक आदिवासी परिवार को करीब 50 लाख रुपये तक मुआवजा देने का प्रावधान है।
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मंत्रियों ने यह भी कहा कि यदि किसी बाहरी व्यक्ति को मुआवजा मिला है, तो उसकी जांच कराई जाएगी। मुआवजा पाने वाले सभी लोगों की सूची सदन के पटल पर रखी जाएगी और किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पेड़ कटाई और भूमि अधिग्रहण पर भी सवाल
सिंगरौली की प्रभारी मंत्री ने जानकारी दी कि परियोजना क्षेत्र में अब तक 33 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं और पांच गांवों की भूमि अधिग्रहित की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल वहां कोयला खनन शुरू नहीं हुआ है, केवल मिट्टी हटाने का काम चल रहा है।
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विपक्ष ने इस पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक प्रभावित परिवारों को पूरा और न्यायसंगत मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक किसी भी तरह का कार्य आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
अन्य मुद्दों पर भी गरमाया सदन
सदन में सिंगरौली के मुद्दे के अलावा अन्य विषय भी उठे।
- मालवा क्षेत्र में अवैध नशे और हथियार तस्करी बढ़ने का मामला उठा।
- रीवा जिले में विद्युतीकरण कार्यों में गड़बड़ी का मुद्दा सामने आया।
- प्रदेश के कई जिलों में स्कूल भवनों के रखरखाव में लापरवाही को लेकर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव रखा गया।
सरकार ने इन सभी मामलों में जांच और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
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विधानसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था दी कि यदि कोई व्यक्ति या अधिकारी जांच को प्रभावित कर सकता है, तो उसके खिलाफ पहले निर्णय लिया जाए।
सरकार ने दोहराया कि वह प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और जांच के बाद दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
फिलहाल सिंगरौली कोल ब्लॉक का मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर गरमाया हुआ है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और मुआवजा सूची सामने आने के बाद इस पूरे विवाद की तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।