हाइलाइट्स
- पचामा इंडस्ट्रियल एरिया की फैक्ट्री दूषित पानी नालों में बहा रही।
- फैक्ट्री में अनिवार्य एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) नहीं लगा।
- दूषित पानी खेतों और जमुनिया डेम तक पहुंच रहा, भूजल-मिट्टी को खतरा।
Sehore Factory Toxic Water : मध्य प्रदेश। सीहोर जिला मुख्यालय के पास पचामा इंडस्ट्रियल एरिया में एक पनीर फैक्ट्री नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही है। फैक्ट्री से निकलने वाला दूषित सफेद और बदबूदार पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के नालों में बहाया जा रहा है। यह पानी आसपास के खेतों और महत्वपूर्ण जल स्रोत जमुनिया डेम तक पहुंच रहा है।
ETP नहीं लगाया
पनीर उद्योग को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ऑरेंज कैटेगरी में रखा गया है। कानून के अनुसार इस तरह के उद्योग में एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) लगाना अनिवार्य है। फैक्ट्री संचालक ने यह प्लांट नहीं लगाया। दूध के अवशेष और रसायन पानी में मिलकर ऑर्गेनिक लोड बढ़ा रहे हैं। इससे पानी जहरीला हो जाता है।
खेतों और डेम को खतरा
यह दूषित पानी नालों से होते हुए खेतों में पहुंच रहा है। इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है। भूजल भी दूषित होने का खतरा है। जमुनिया डेम में मिलने से पूरा जल स्रोत प्रदूषित हो सकता है। किसानों का कहना है कि फसलें प्रभावित हो रही हैं।
भागीरथपुरा हादसे का सबक नहीं
इंदौर के भागीरथपुरा में जहरीले पानी से 29 लोगों की मौत हुई थी। उस घटना से भी प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया। पचामा में भी यही स्थिति बन रही है। स्थानीय लोग गुस्से में हैं।
जिला उद्योग महाप्रबंधक का जवाब
जिला उद्योग महाप्रबंधक अनुराग वर्मा ने कहा कि उन्हें यह जानकारी मीडिया से मिली है। उन्होंने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करने और उसके बाद कार्रवाई तय करने की बात कही है। अभी तक कोई औपचारिक शिकायत या जांच नहीं हुई है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य पर खतरा
स्थानीय लोग कह रहे हैं कि यह पानी पीने और खेती के लिए इस्तेमाल होने से स्वास्थ्य को बहुत खतरा है। बच्चे और पशु भी प्रभावित हो सकते हैं। फैक्ट्री के पास से गुजरने वाले लोग बदबू से परेशान हैं।
क्या होगा आगे
प्रशासन ने अभी तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की है। स्थानीय लोग प्रदूषण रोकने और फैक्ट्री पर जुर्माना लगाने की मांग कर रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी त्वरित जांच की अपील की गई है।