हाइलाइट्स
- भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का आंकड़ा 25 पहुंचा।
- जांच के लिए राज्य सरकार ने गठित की समिति।
- अपर मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ल की करेंगे अध्यक्षता।
Indore Contaminated Water : मध्य प्रदेश। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की सप्लाई से हुई मौतों का आंकड़ा अब 25 पहुंच गया है। मंगलवार रात इलाज के दौरान हेमंत गायकवाड़ (51) की मौत हो गई। वे ई-रिक्शा चलाकर परिवार चलाते थे और उनके पीछे चार बेटियां हैं। उनकी मौत से परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया है। इस घटना में कई लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं।
Bhojshala Basant Panchami 2026 : दिग्विजय सिंह की मांग, दोपहर 1-3 बजे नमाज के लिए समय छोड़ा जाए
राज्य स्तरीय जांच समिति गठित
राज्य सरकार ने अब इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य स्तरीय जांच समिति गठित कर दी है। समिति की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ला करेंगे।
सदस्यों में प्रमुख सचिव पी. नरहरि और आयुक्त संकेत भोडवे शामिल हैं। आयुक्त इंदौर संभाग सुदाम खाड़े को सदस्य-सचिव बनाया गया है। समिति को एक माह के अंदर अपनी रिपोर्ट राज्य शासन को सौंपनी होगी।
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई
समिति भागीरथपुरा में हुई दूषित जल आपूर्ति की पूरी घटना की समीक्षा करेगी। इसमें घटना के वास्तविक कारण, प्रशासनिक और तकनीकी कमियों की जांच होगी।
लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए समिति सुझाव भी देगी। समिति को रिकॉर्ड मांगने और स्थल निरीक्षण का पूरा अधिकार दिया गया है।
पानी में मिला ई-कोलाई बैक्टीरिया
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने इस मामले में न्यायिक जांच और FIR की मांग वाली याचिकाओं पर आदेश सुरक्षित रख लिया है। सरकार ने अदालत को बताया कि पानी की जांच में कई नलकूपों में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया है, जो आमतौर पर सीवेज से फैलता है। इलाके में अभी भी गंदे पानी की शिकायतें मिल रही हैं। लोग डरे हुए हैं और साफ पानी की मांग कर रहे हैं।
Bhopal Murder Case : तीखी बहस के बाद पति ने की पत्नी की हत्या, गले पर मिले उंगलियों के निशान
मृतकों के परिजनों को मुआवजा
प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की बात कही है, लेकिन स्थानीय लोग स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। यह घटना इंदौर की जल आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। लोग अब टैंकरों और बोतलबंद पानी पर निर्भर हैं। प्रशासन ने इलाके में सफाई और क्लोरिनेशन का अभियान तेज कर दिया है।