Bhopal RSS Centenary Year : भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक संपन्न हुई। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि सामाजिक सद्भाव कोई नई अवधारणा नहीं, बल्कि भारतीय समाज का स्वभाव है। मत, पंथ, भाषा और जाति अलग हो सकती हैं, लेकिन हिंदू पहचान सबको जोड़ती है।
हमारी संस्कृति, धर्म और पूर्वज एक हैं। बैठक में प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा और मध्यभारत प्रांत संघचालक अशोक पांडेय भी मौजूद रहे। मध्यभारत के 16 जिलों से विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
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हिंदू केवल धार्मिक पहचान नहीं, बल्कि स्वभाव और जीवन पद्धति
डॉ. भागवत ने कहा कि हिंदू केवल धार्मिक पहचान नहीं, बल्कि स्वभाव और जीवन पद्धति है। धर्म का अर्थ सबको साथ लेकर चलना और कर्तव्य निभाना है। विविधता में एकता हमारी पहचान है।
कानून नियंत्रित करता है, लेकिन सद्भावना समाज को जोड़ती है। संकट में नहीं, हर समय सद्भाव बनाए रखें। मिलना-जुलना और संवाद पहली शर्त है। समर्थ को दुर्बल की मदद करनी चाहिए।
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संघ की पद्धति अनोखी
सरसंघचालक ने कहा कि संघ को किसी से तुलना कर नहीं समझा जा सकता। यह व्यक्ति और समाज निर्माण की अनोखी पद्धति है। डॉ. हेडगेवार ने समाज में एकता लाने के लिए स्थापना की। विरोध के बावजूद स्वयंसेवकों के त्याग से आगे बढ़ा। शताब्दी वर्ष में समाज तक सही जानकारी पहुंचाई जा रही है।
संघ और शिव एक समान
पंडित मिश्रा ने कहा कि संघ और शिव में समानता है। शिव ने विष पिया, संघ आरोपों का विष पीकर राष्ट्रहित में काम करता है। जन्म किसी जाति में हो, पहचान हिंदू-सनातनी है। धर्मांतरण षड्यंत्र है, सजग रहें। ग्रीन महाशिवरात्रि जैसे अभियान समरसता का उदाहरण हैं। राष्ट्र निर्माण में सब एकजुट हों।
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विभिन्न समाजों का प्रतिवेदन
बैठक में तेली साहू, जैन मिलन, मीणा समाज, यादव महासभा, राजपूत, रघुवंशी, कायस्थ, जाटव, माहेश्वरी, भार्गव समाज आदि ने अपने कार्यों का प्रतिवेदन दिया। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, समरसता पर जोर।
समाज स्वयं समस्याओं का करे समाधान
बैठक का समापन पंच परिवर्तन (समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, स्व-बोध, अनुशासन) पर काम करने के संकल्प से हुआ। समाज स्वयं समस्याओं का समाधान करे। यह पूरे हिंदू समाज की बैठक है। यह बैठक सामाजिक एकता का संदेश देती है। विविधता में एकता भारतीय स्वभाव है।