Latest

Vidisha News : स्कूल भवनों हुए जर्जर, अब पेड़ के नीचे लग रही प्राइमरी के बच्चों की क्लास

Vidisha News

Vidisha News : विदिशा। मध्य प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा की असल तस्वीर देखनी हो तो विदिशा जिले के गांवों में चले जाइए। यहां चंपाखेड़ी, गजनयाई और अकोदिया जैसे कई गांवों के प्राइमरी स्कूलों की इमारतें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि उनमें बैठना जान जोखिम में डालने जैसा है। नतीजा छोटे-छोटे बच्चे पेड़ों के नीचे या खुले मैदान में ही क्लास कर रहे हैं।

MP Road Accident : तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली ने बाइक को मारी टक्कर, सरकारी टीचर सहित दो की मौके पर मौत

अकोदिया प्राथमिक शाला की स्थिति सबसे दयनीय है। स्कूल की पुरानी बिल्डिंग को “खतरनाक” घोषित कर दिया गया है। ऊपर से कलेक्टर और शिक्षा विभाग के सख्त आदेश हैं कि जर्जर भवन में बच्चों को नहीं बिठाया जाए।

शिक्षक बलबीर सिंह ने बताया, “हम क्या करें? बिल्डिंग में बैठाएंगे तो हमारी नौकरी चली जाएगी, बच्चों की जान जाएगी इसलिए ज्यादातर दिन मैदान में ही क्लास लगाते हैं। एक टीनशेड वाला कमरा किराए पर लिया है, बारिश के दिनों में वहीं ठूंस-ठूंस कर बच्चों को बैठाते हैं।”

Vidisha News : ऑप्टिकल फाइबर के लिए खोदे गड्ढे बन रहे खतरा, ग्यारसपुर में गड्ढे में गिरी गाय

ग्रामीण बताते हैं कि गर्मी में धूप और सर्दी में ठंड – बच्चों को सब कुछ झेलना पड़ता है। पढ़ाई का तो पता नहीं, लेकिन बीमार जरूर पड़ रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी आर.पी. लखेरा पहले तो कहते हैं – “जिले में कहीं भी पेड़ के नीचे स्कूल नहीं चलता, कोई नाम बताओ।” लेकिन फिर स्वीकार करते हैं कि जिले में बड़ी संख्या में भवन जर्जर हैं। उनके मुताबिक:

  • 297 स्कूल इतने खतरनाक थे कि कलेक्टर के आदेश पर उन्हें तोड़ने का काम शुरू हुआ, जिसमें से 200 से ज्यादा गिरा चुके हैं।
  • 1145 स्कूलों को मरम्मत की जरूरत है, प्रस्ताव राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल भेजे गए हैं।
  • अभी सिर्फ 98 स्कूलों की मरम्मत को स्वीकृति मिली है, काम चल रहा है।

MP Cold Weather : मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड शुरू, भोपाल का 84 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा, 18 शहरों में पारा 10°C से नीचे

यानी आने वाले कई साल तक सैकड़ों बच्चे पेड़ के नीचे या खुले आसमान के नीचे ही पढ़ते रहेंगे। ग्रामीणों और शिक्षकों की मांग है कि कम से कम अस्थायी टीनशेड या प्री-फैब्रिकेटेड क्लासरूम तुरंत मुहैया कराए जाएं, ताकि बच्चों को मौसम की मार न झेलनी पड़े।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *