Bhopal Dams Footbridge Upgrade : केरवा डैम हादसे के बाद बड़ा फैसला, 40 साल पुराने बांधों के गेट-फुटब्रिज होंगे अपग्रेड

Bhopal Dams Footbridge Upgrade

Bhopal Dams Footbridge Upgrade : मध्य प्रदेश। भोपाल के केरवा डैम पर फुट ओवर ब्रिज का हिस्सा गिरने की घटना ने पूरे मध्य प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है। गनीमत रही कि ब्रिज पर आवागमन बंद था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। इस घटना के बाद जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने सख्त तेवर अपनाते हुए सभी बांधों के गेट और फुट ओवर ब्रिज की फिजिकल जांच कराने के निर्देश दे दिए हैं। मंत्री ने स्वयं केरवा डैम का निरीक्षण किया और विभागीय अधिकारियों को तुरंत रिपोर्ट बनाने को कहा।

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मंत्री तुलसी सिलावट ने मौके पर ही ईएनसी और वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति कहीं न हो, इसलिए全省 के 10 बेसिन में सभी बांधों की जांच होगी। जांच तीन कैटेगरी ए, बी और सी में होगी।

सबसे पहले ए कैटेगरी के बांधों को अपग्रेड किया जाएगा। खासकर 40 साल पुराने बांधों के गेट और फुट ओवर ब्रिज को नया किया जाएगा। 25 साल पुराने बांधों को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

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केरवा डैम का फुट ओवर ब्रिज 1975 में शुरू होकर 1980 में पूरा हुआ था। यह करीब 50 साल पुराना है। मंत्री ने बताया कि ब्रिज के सुधार के लिए एक हफ्ते में डीपीआर तैयार होगी। सभी स्लैब 5 महीने में बदल दिए जाएंगे।

इसमें करीब 5 करोड़ रुपये खर्च होंगे। साथ ही डैम पर लगे 8 पुराने गेट भी बदले जाएंगे। केरवा पर चार स्लैब ऑटोमेटिक टिल्टिंग गेट थे, जो अब जर्जर हो चुके हैं।

मंत्री ने पुराने बांधों की लिस्ट भी गिनाई। 40 साल पुराने बांधों में गांधी सागर (1960, मंदसौर), भदभदा (1965, भोपाल), तवा (1978, नर्मदापुरम) और बारना (1978, रायसेन) शामिल हैं। 25 साल पुराने में बरगी (1988, जबलपुर) और संजय सरोवर (1988, सिवनी) हैं। वहीं 25 साल से कम उम्र वाले बांध जैसे इंदिरा सागर (2005, खंडवा), बाणसागर (2006, शहडोल), ओंकारेश्वर (2007, खंडवा) और मणिखेड़ा (2008, शिवपुरी) भी जांच के दायरे में आएंगे।

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दरअसल, बीते मंगलवार को केरवा डैम के बाएं तरफ बने ब्रिज का हिस्सा अचानक ढह गया। यह ब्रिज सरैया जी की कल्पना से बना था। घटना के बाद मंत्री ने तुरंत निरीक्षण किया और कहा कि जांच में जो कमियां निकलेंगी, उनकी समीक्षा कर सख्त कार्रवाई होगी। विभाग अब सभी बांधों पर फोकस करेगा ताकि मानसून से पहले सब सुरक्षित हो जाएं। यह फैसला लोगों की जान-माल की रक्षा के लिए अहम है।

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