सौरव-आशुतोष पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- कानून के सम्मान की कमी, फिर अपराध दोहराने की आशंका
दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी के सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ा दी। अदालत ने कानून के प्रति सम्मान और प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रदर्शन बुलाने को लेकर चिंता जताई। दोनों को लिखित जवाब और नए जमानतदारों के दस्तावेज देने को कहा गया है।

Delhi News: दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति और कानून-व्यवस्था को लेकर चल रहा विवाद अब अदालत की सख्त टिप्पणियों तक पहुंच गया है। कॉकरोच जनता पार्टी के सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ा दी गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने उनके आचरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि उपलब्ध तथ्यों से कानून के प्रति सम्मान की कमी और प्रतिबंधित क्षेत्रों में बार-बार प्रदर्शन बुलाने की प्रवृत्ति नजर आती है।
स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ऋतु राज ने 19 अक्टूबर को दिए आदेश में कहा कि दोनों ने कथित तौर पर 11 अक्टूबर को दिए गए बॉन्ड की शर्तों का जानबूझकर उल्लंघन किया, जिससे शांति भंग होने की आशंका पैदा हुई। अदालत ने यह भी माना कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न होने का भरोसा नहीं किया जा सकता।
अदालत ने आचरण पर क्यों उठाए सवाल?
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि प्रतिवादियों के व्यवहार और उनके बयानों को देखते हुए यह आशंका बनी हुई है कि वे आगे भी इसी तरह की गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। मामले में सामने आई परिस्थितियां कानून के प्रति सम्मान की कमी और प्रतिबंधित स्थानों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की प्रवृत्ति की ओर इशारा करती हैं। अदालत की ये टिप्पणियां दिल्ली पुलिस की उस मांग पर सुनवाई के दौरान आईं, जिसमें दोनों नेताओं की हिरासत आगे बढ़ाने की अपील की गई थी।
दिल्ली पुलिस ने क्या दलील दी?
दिल्ली पुलिस के जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि मामले में सामने आए घटनाक्रम से शांति व्यवस्था बिगड़ने की आशंका बनी हुई है। पुलिस ने यह भी उल्लेख किया कि इस मामले की सुनवाई कर चुके पूर्व मजिस्ट्रेट को कथित तौर पर एक अज्ञात व्हाट्सऐप संदेश भेजा गया था, जिसे धमकी के रूप में देखा गया। इसके बाद संबंधित मजिस्ट्रेट ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
साथ ही पुलिस का आरोप है कि कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्यों ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित न किए जाने के बावजूद वहां लोगों को जुटने का आह्वान किया। पुलिस ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया के जरिए कनॉट प्लेस में प्रदर्शन की घोषणा की गई, जबकि इन स्थानों पर प्रदर्शन को लेकर प्रतिबंध लागू हैं।
वकीलों ने की तत्काल रिहाई की मांग
जिसके बाद सौरव दास और आशुतोष रांका के वकीलों ने पुलिस की हिरासत बढ़ाने की मांग का विरोध किया। बचाव पक्ष ने अदालत से दोनों को तत्काल रिहा करने की अपील की और कहा कि वे कथित गतिविधियों को दोबारा नहीं दोहराएंगे। वकीलों ने यह दलील भी दी कि 10 अक्टूबर के बाद दोनों ने किसी प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया। उन्होंने मामले में गिरफ्तार एआईएसए नेता नेहा बोरा और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दिपके की रिहाई का भी हवाला दिया।
लिखित जवाब और नए जमानतदारों के दस्तावेज मांगे
बता दें, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि पुलिस की ओर से पेश सामग्री शांति भंग होने की गंभीर आशंका दर्शाती है, जिसका असर आम जनजीवन पर पड़ सकता है। अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका को दो दिन के भीतर लिखित जवाब दाखिल करने का अवसर दिया है। उन्हें यह जवाब पहले जांच अधिकारी को उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया। इसके अलावा, अदालत ने जमा कराए गए जमानतदारों के दस्तावेजों में विसंगतियों का जिक्र करते हुए नए दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा।
21 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई
वहीं, मामले की अगली सुनवाई बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजे निर्धारित की गई है। इस दौरान दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा। अब आगे की सुनवाई में उनके लिखित जवाब और पुलिस की ओर से पेश तथ्यों पर विचार किया जाएगा।
