हाइलाइट्स
- गर्ल्स कॉलेज वार्षिक उत्सव में प्राचार्य ने दी मुगल-ए-आजम और उमराव जान देखने की सलाह।
- विदिशा शासकीय राजमाता विजयाराजे सिंधिया कन्या महाविद्यालय का मामला।
- छात्रा ने कहा- शिक्षा के मंदिर में ऐसी विचारधारा थोपना गलत।
Vidisha Girls College Controversy : मध्य प्रदेश। विदिशा के शासकीय राजमाता विजयाराजे सिंधिया कन्या महाविद्यालय में वार्षिक उत्सव के दौरान प्राचार्य वी.डी. अहिरवार के एक बयान ने छात्राओं के स्वाभिमान को झकझोर दिया। प्राचार्य ने छात्राओं को संबोधित करते हुए मुगलकालीन फिल्मों मुगल-ए-आजम और उमराव जान को समाज का आइना बताते हुए इन्हें देखने की सलाह दी।
पृथ्वीराज चौहान के जीवन से सीखना चाहिए राष्ट्रधर्म
यह बयान छात्राओं को हजम नहीं हुआ। छात्रा महिमा दुबे ने मंच से ही प्राचार्य को चुनौती देते हुए कहा, “हमें मुगल-ए-आजम से नहीं, बल्कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान के जीवन से राष्ट्रधर्म सीखना चाहिए। हमारी प्रेरणा उमराव जान नहीं, बल्कि रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती और रानी पद्मिनी जैसी वीरांगनाओं का शौर्य होना चाहिए।”
प्राचार्य की वामपंथी मानसिकता
महिमा के इस बयान पर प्राचार्य ने हाथ झाड़ते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता ये फिल्में कब बनीं। छात्राओं का सीधा आरोप है कि प्राचार्य की यह वामपंथी मानसिकता है, जो जानबूझकर भारतीय संस्कृति और इतिहास को कमतर दिखाने की कोशिश कर रही है।
मुगल-ए-आजम जैसी अय्याशी वाली फिल्म
कवि दीपेंद्र सिंह (जिला प्रवक्ता, करणी सेना) ने कहा कि प्राचार्य भारत में रहते हैं या कहीं बाहर से आए हैं? मुगल तो हमारे यहां बाहर से आए थे। मुगल-ए-आजम जैसी अय्याशी वाली फिल्म को सामाजिक परिदृश्य बताना गलत है।
उसके पहले राजा हरिश्चंद्र फिल्म आई थी, जो सत्य बोलने पर आधारित थी और बच्चों को झूठ न बोलने की सीख देती है, लेकिन प्राचार्य उसे भूल गए। करणी सेना इस मामले में ज्ञापन देने वाली है।