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IAS Controversial Statement : IAS संतोष वर्मा के विवादित बयान पर वबाल, मध्य प्रदेश से यूपी तक आक्रोश, FIR की उठी मांग

IAS Santosh Verma controversy

IAS Santosh Verma Controversial Statement : भोपाल। मध्य प्रदेश में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा इन दिनों सुर्खियों में हैं, लेकिन गलत वजह से। 23 नवंबर को भोपाल के अंबेडकर मैदान में अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (AJAKS) के प्रांतीय सम्मेलन में उन्होंने रिजर्वेशन को लेकर एक आपत्तिजनक बयान दिया। वर्मा ने कहा, “रिजर्वेशन तब तक जारी रहना चाहिए जब तक एक ब्राह्मण अपनी बेटी को मेरे बेटे को दान न कर दे या उसके साथ संबंध न बनाए।”

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यह बयान वायरल वीडियो के जरिए सोशल मीडिया पर फैल गया और पूरे राज्य में ब्राह्मण समाज का गुस्सा भड़क उठा। समाज ने इसे जातिवादी, अपमानजनक और महिलाओं के खिलाफ बताया। वर्मा ने बाद में सफाई दी कि उनका इरादा किसी समुदाय को ठेस पहुंचाने का नहीं था, बल्कि उन्होंने ‘कन्यादान’ और सामाजिक समानता की बात की थी। उन्होंने माफी मांग ली।

सरकार ने भी तुरंत प्रतिक्रिया दी। 26 नवंबर को सामान्य प्रशासन विभाग ने वर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया। नोटिस में कहा गया कि यह बयान ऑल इंडिया सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स 1968 का उल्लंघन है, जो अनुशासनात्मक कार्रवाई का आधार बन सकता है। वर्मा को सात दिनों में जवाब देने को कहा गया है।

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डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने बयान को “विकृत मानसिकता” का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “एक आईएएस अधिकारी द्वारा बहनों-बेटियों पर ऐसी टिप्पणी असंवेदनशील, विभाजनकारी और सामाजिक सौहार्द के खिलाफ है। यह भारतीय संस्कृति का अपमान है। सरकार संतुष्टि न मिलने पर कड़ी कार्रवाई करेगी।” शुक्ला ने इसे मातृशक्ति के खिलाफ भी बताया।

ब्राह्मण समाज का आक्रोश सड़कों पर उतर आया। भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर गुरुवार को सैकड़ों लोगों ने धरना दिया। उन्होंने वर्मा का पुतला फूंका और सांकेतिक चक्काजाम किया, जिससे ट्रैफिक जाम हो गया। प्रदर्शन में महिलाएं भी शामिल रहीं।

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समाज के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र शर्मा, पूर्व नगर निगम चेयरमैन कैलाश मिश्रा और भाजपा नेता गिरीश शर्मा जैसे बड़े नाम मौजूद थे। उन्होंने पुलिस थाने में FIR की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। सिवनी और छपारा में ब्राह्मण समाज ने रैली निकाली और राज्यपाल को ज्ञापन दिया।

झाबुआ में परशुराम सेना ने सीएम के नाम तहसीलदार को मांग पत्र भेजा। आलीराजपुर में कलेक्टर को ज्ञापन मिला। देवास में अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ ने मार्च किया। मंदसौर के गांधी चौराहे पर नारेबाजी हुई और शामगढ़ में पुतला दहन किया गया।

ग्वालियर में वकीलों ने एसपी ऑफिस पहुंचकर FIR की मांग की। ऑल इंडिया ब्राह्मण समाज के पुष्पेंद्र मिश्रा ने कहा, “यह ब्राह्मण बेटियों का अपमान है। FIR न हुई तो statewide आंदोलन होगा।”

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सोशल मीडिया पर भी हंगामा मचा है। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा और पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा पर चुप्पी के लिए ट्रोलिंग हो रही है। दोनों ने अब तक कोई बयान नहीं दिया। वहीं, पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने विरोध जताया। उन्होंने कहा, “ऐसे चरित्रहीन अफसर को आईएएस बनाया ही क्यों? उनके खिलाफ यौन शोषण के केस भी हैं। हम सीएम और मुख्य सचिव से मिलेंगे।”

विवाद उत्तर प्रदेश तक पहुंच गया। वहां के भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने गाजियाबाद के लोनी थाने में वर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज की। उन्होंने रासुका लगाने और FIR की मांग की, कहा “यह देश की बेटियों का अपमान है।”

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बता दें कि, आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा का यह पहला विवाद नहीं है। 2012 बैच के आईएएस (पहले राज्य सेवा से) पर पहले फर्जी कोर्ट ऑर्डर और सीबीआई जज के सिग्नेचर जाली बनाने के आरोप लगे थे। वे कृषि विभाग में डिप्टी सेक्रेटरी हैं।

विपक्ष के हेमंत कटारे ने भी FIR और बर्खास्तगी की मांग की। यह मामला अब जातिगत तनाव बढ़ाने वाला बन गया है। ब्राह्मण संगठन सस्पेंशन और FIR पर अड़े हैं, जबकि सरकार कार्रवाई का संकेत दे रही है। राज्य में सामाजिक समरसता बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है।

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