Narmadapuram News : नर्मदापुरम। मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में धान की नरवाई (पराली) जलाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रदूषण और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाली इस प्रथा पर प्रशासन सख्त है। अब तक 4 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 300 से ज्यादा किसानों पर जुर्माना लगाया गया है। माखननगर में अकेले 50 किसानों से 3 लाख रुपये वसूले गए। बावजूद इसके कई गांवों में रोजाना खेतों में आग की लपटें उठ रही हैं, जिससे जिले की हवा जहरीली हो रही है और छवि खराब हो रही है।
Narmadapuram News : पराली जलाने के 300+ मामले, 4 पर FIR, सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने दिया गोलमोल जवाब
प्रशासन बेलर मशीन से नरवाई के बंडल और भूसा मशीन से भूसा बनवाकर किसानों को मुफ्त या सब्सिडी पर उपलब्ध करा रहा है। ताकि पराली जलाने की बजाय उसका उपयोग पशु चारा, खाद या उद्योग में हो लेकिन कई किसान अभी भी पुरानी आदत से बाज नहीं आ रहे। सैटेलाइट इमेजरी से खेतों की निगरानी की जा रही है। लोकेशन मिलते ही टीम मौके पर पहुंचकर जुर्माना और एफआईआर दर्ज कर रही है।
माखननगर में सबसे ज्यादा मामले
माखननगर क्षेत्र में पराली जलाने के 50 मामले पकड़े गए। इन किसानों पर कुल 3 लाख रुपये का जुर्माना ठोका गया। ग्राम आंचलखेड़ा और प्रेमतला में दो किसानों पर FIR दर्ज हुई।
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तहसीलदार महेंद्र चौहान ने बताया कि सैटेलाइट से खेत चिन्हित किए गए। रिपोर्ट एसडीएम को भेजी गई और उन्होंने जुर्माना लगाया। जुर्माना न भरने वालों की चल-अचल संपत्ति कुर्क करने की चेतावनी दी गई है। जानबूझकर आग लगाने पर सीधे एफआईआर होगी।
सांसद दर्शन सिंह चौधरी का जवाब
सांसद दर्शन सिंह चौधरी से सवाल किया गया कि नर्मदापुरम में पराली जलाने के सबसे ज्यादा मामले क्यों? किसान नेता के रूप में वे क्या कर रहे हैं? जवाब में उन्होंने कहा, “सरकार पूरे प्रबंध कर रही है।
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किसान जागरूक हैं। समझाइश दी जा रही है। अगली फसल की बोवनी का समय है, इसलिए जल्दबाजी होती है। उचित हल निकलेगा।” सांसद गोलमोल बात करके जिम्मेदारी से बचते दिखे। उन्होंने कोई ठोस योजना या व्यक्तिगत प्रयास नहीं बताया।
किसान नेता से सांसद बने चौधरी
दर्शन सिंह चौधरी पहले भारतीय किसान संघ से जुड़े थे। बाद में बीजेपी किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। किसान हितैषी छवि के कारण लोकसभा चुनाव में टिकट मिला और वे सांसद बने। अब उनसे उम्मीद थी कि पराली जलाने की समस्या का जमीनी हल निकालेंगे, लेकिन जवाब निराशाजनक रहा।
जुर्माना न भरने पर कुर्की
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जुर्माना न भरने वालों की जमीन, ट्रैक्टर या अन्य संपत्ति कुर्क होगी। जानबूझकर आग लगाने पर एफआईआर से कोई बच नहीं सकता। जिले में पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है। गांवों में जागरूकता कैंप भी लग रहे हैं।
क्यों जलाते हैं किसान पराली?
अगली फसल (गेहूं) की बोवनी के लिए जल्दी खेत खाली करना।
बेलर मशीन की कमी या दूर होना।
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भूसा बनाने में मेहनत और समय लगना।
जागरूकता की कमी।
प्रशासन का कहना है कि मशीनें उपलब्ध हैं, सब्सिडी दी जा रही है। फिर भी कुछ किसान लापरवाही कर रहे हैं। पराली जलाने से दिल्ली-एनसीआर तक प्रदूषण फैलता है और स्वास्थ्य को नुकसान होता है।