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Rajgarh News : सांची दूध जांच शिविर में 17 सैंपल मिलावटी, हर तीसरे सैंपल में मिला पानी

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Rajgarh News : राजगढ़। मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की इंदिरा कॉलोनी में शनिवार को सांची डेयरी की टीम ने दूध जांच शिविर लगाया। शिविर में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। कुल 39 सैंपल लिए गए, जिनमें दूध, दही, घी और पनीर शामिल थे। चौंकाने वाली बात यह रही कि 17 सैंपल में पानी की मिलावट पाई गई। यानी हर तीसरा सैंपल मिलावटी निकला।

इसके अलावा एक सैंपल पूरी तरह असामान्य पाया गया, जिसकी बनावट और रंग सामान्य दूध से बिल्कुल अलग थे। जांच रिपोर्ट देखकर कई लोगों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दीं।

शिविर में लोग अपने घरों से रोज इस्तेमाल होने वाला दूध, दही, घी और पनीर लेकर पहुंचे थे। सबके मन में एक ही सवाल था – “हम जो रोज पी रहे हैं, क्या वह शुद्ध है?” जांच के बाद कई परिवारों को पता चला कि वे महीनों से मिलावटी दूध का सेवन कर रहे थे।

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मिलावट से बच्चों-बुजुर्गों की सेहत को खतरा

जांच टीम ने चेतावनी दी कि दूध में पानी मिलाना बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की सेहत के लिए खतरनाक है। इससे पोषण की कमी होती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ती है।

असामान्य सैंपल की जांच में आशंका जताई गई कि उसमें पानी के अलावा यूरिया, डिटर्जेंट या अन्य हानिकारक पदार्थ भी मिलाए गए हो सकते हैं। टीम ने कहा कि ऐसे मिलावटी उत्पाद लंबे समय तक सेवन करने से किडनी, लीवर और पाचन तंत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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खुले दूध में मिलावट का सबसे बड़ा खतरा

टीम ने लोगों को समझाया कि खुले दूध में मिलावट का खतरा सबसे ज्यादा होता है। यह बिना किसी पंजीयन, लाइसेंस या गुणवत्ता जांच के बिकता है। दूध बेचने वाले अक्सर पानी, स्टार्च, यूरिया या सफेद पाउडर मिलाकर मात्रा बढ़ाते हैं।

वहीं, पैकेटबंद पाश्चुराइज्ड दूध सबसे सुरक्षित होता है। यह पूरी प्रक्रिया से गुजरता है, जिसमें बैक्टीरिया नष्ट होते हैं और मिलावट की गुंजाइश न के बराबर रहती है।

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सांची उत्पादों का स्वाद चखाया

शिविर में सांची के लोकप्रिय उत्पाद जैसे नमकीन मठा, मीठा दही और ताजा पनीर चखाए गए। कई लोगों ने कहा कि सांची के उत्पादों का स्वाद और गुणवत्ता खुले दूध से बिल्कुल अलग है। एक महिला ने बताया, “अब पता चला कि असली दूध का स्वाद कैसा होता है। आगे से खुले दूध की जगह सांची का पैकेट दूध ही लेंगे।”

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जागरूकता ही मिलावट रोकने का हथियार

इस शिविर का मुख्य उद्देश्य लोगों को मिलावट से बचाना और सही विकल्प चुनने के लिए जागरूक करना था। टीम ने कहा कि अगर उपभोक्ता सतर्क रहें, दूध की जांच करवाएं और सवाल पूछें, तो मिलावटखोरों का धंधा अपने आप बंद हो जाएगा। सांची की टीम ने लोगों को घर पर दूध की शुद्धता जांचने के आसान तरीके भी बताए, जैसे लैक्टोमीटर से घनत्व जांचना और उबालकर देखना।

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