हाइलाइट्स
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एमपी में दूध बेचने वालों के लिए लाइसेंस अनिवार्य
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मिलावटी दूध पर रोक लगाने के लिए सरकार की सख्ती
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दूध संग्रह और परिवहन उपकरणों की नियमित जांच होगी
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कामधेनु योजना के तहत 25 गायों पर 10 लाख तक प्रोत्साहन
Milk Sellers License MP : भोपाल। मध्य प्रदेश में अब डेयरी सहकारी समितियों को छोड़कर सभी दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। राज्य सरकार जल्द ही ऐसे सभी लोगों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है।
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सरकार का मानना है कि इस फैसले से दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
दूध संग्रह और परिवहन की होगी निगरानी
सरकार ने दूध के संग्रह, परिवहन और भंडारण में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की जांच के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही ऐसे दूध उत्पादकों और विक्रेताओं की पहचान की जाएगी जो अभी तक पंजीकृत नहीं हैं। दूध से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी के लिए मासिक रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी।
मध्य प्रदेश देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों में
मध्य प्रदेश देश के प्रमुख दूध उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहां देश के कुल दूध उत्पादन का करीब 9 प्रतिशत यानी लगभग 213 लाख टन दूध का उत्पादन होता है। प्रदेश में सांची दूध प्रमुख डेयरी ब्रांड है। ग्रामीण क्षेत्रों में दूध संग्रह को बढ़ावा देने के लिए 381 नई सहकारी समितियां भी काम कर रही हैं।
दूध उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में पिछले वर्ष नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के साथ भी अनुबंध किया गया था।
कामधेनु योजना से मिलेगा प्रोत्साहन
दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना शुरू की है। इस योजना के तहत 25 गायों की यूनिट स्थापित करने पर 10 लाख रुपए तक की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है।
FSSAI ने जारी की एडवाइजरी
केंद्र सरकार की संस्था भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने भी दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के लिए पंजीकरण या लाइसेंस अनिवार्य करने संबंधी एडवाइजरी जारी की है।
इसमें कहा गया है कि डेयरी सहकारी समितियों के सदस्यों को छोड़कर सभी को खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत लाइसेंस लेना होगा।