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Bhopal Child Rape : भोपाल रेप-मर्डर केस में बड़ा मोड़, सुप्रीम कोर्ट ने दोषी की फांसी पर लगाई रोक

Bhopal Crime News

हाइलाइट्स

  • भोपाल के शाहजहांनाबाद केस में दोषी की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

  • आरोपी अतुल निहाले को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई थी तिहरी फांसी

  • मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखी थी मौत की सजा

  • सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच करेगी अब विस्तृत सुनवाई

  • 24 सितंबर 2024 को हुई थी 5 साल की बच्ची की हत्या

 

Bhopal Child Rape : भोपाल। राजधानी भोपाल के शाहजहांनाबाद इलाके में 5 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी अतुल निहाले की फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है।

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सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की याचिका पर सुनवाई करते हुए डेथ सेंटेंस के क्रियान्वयन पर स्टे दे दिया है और मामले की विस्तृत सुनवाई करने का फैसला किया है।

सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया ने यह आदेश दिया। अदालत ने कहा कि फिलहाल फांसी की सजा के अमल पर रोक रहेगी और अब सजा व दोष सिद्धि से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई की जाएगी।

कोर्ट रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर तय करेगा कि निचली अदालतों के फैसले में किसी हस्तक्षेप की जरूरत है या नहीं।

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विशेष पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई थी तिहरी फांसी

इस जघन्य मामले में भोपाल की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 18 मार्च 2025 को फैसला सुनाते हुए आरोपी अतुल निहाले को तीन अलग-अलग धाराओं में फांसी की सजा दी थी।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू होने के बाद मध्यप्रदेश में यह पहला मामला था, जिसमें किसी दोषी को अलग-अलग धाराओं में तीन बार मृत्युदंड दिया गया था। इसके अलावा अदालत ने आरोपी को दो धाराओं में उम्रकैद और दो अन्य धाराओं में सात-सात साल की सजा भी सुनाई थी।

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हाईकोर्ट ने बरकरार रखी थी सजा

स्पेशल कोर्ट के फैसले को आरोपी ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जबलपुर स्थित हाईकोर्ट की डबल बेंच ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए फांसी की सजा बरकरार रखी थी।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि आरोपी ने अत्यंत अमानवीय और नृशंस अपराध किया है। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि पांच साल की बच्ची ने जिस पीड़ा को झेला, उसे शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है और इसकी कल्पना ही रूह कंपा देने वाली है।

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अदालत ने माना था दुर्लभतम श्रेणी का अपराध

भोपाल की विशेष अदालत ने अपने फैसले में इस अपराध को ‘दुर्लभतम श्रेणी’ का मामला बताया था। अदालत ने कहा था कि यदि मृत्युदंड से भी बड़ी कोई सजा होती तो आरोपी उसका भी पात्र होता।

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि यदि समाज बच्चों को सुरक्षित माहौल नहीं दे सकता, जहां वे अपने घर और आसपास सुरक्षित खेल सकें, तो सभ्य समाज की कल्पना भी कठिन हो जाती है।

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24 सितंबर 2024 को हुई थी घटना

घटना 24 सितंबर 2024 को शाहजहांनाबाद इलाके में हुई थी। दोपहर के समय पांच साल की बच्ची अपनी दादी के साथ मल्टी में स्थित बड़े पापा के फ्लैट पर थी।

दादी ने उसे स्कूल की किताबें लाने के लिए नीचे भेजा था, लेकिन वह काफी देर तक वापस नहीं लौटी। इसके बाद परिवार और मल्टी में रहने वाले लोगों ने उसकी तलाश शुरू की। कोई सुराग नहीं मिलने पर बच्ची के पिता ने शाहजहांनाबाद थाने में अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

घर की टंकी में मिला था शव

पुलिस जांच के दौरान आरोपी के घर से बदबू आने की शिकायत मिली। तलाशी लेने पर बाथरूम के ऊपर रखी प्लास्टिक की पानी की टंकी से दुर्गंध आ रही थी।

जब टंकी को नीचे उतारा गया तो उसमें बच्ची का शव मिला। शव को कपड़ों और अन्य सामान से ढंककर छिपाया गया था। जांच में सामने आया कि आरोपी ने वारदात के बाद शव को तीन दिन तक टंकी में छिपाकर रखा था।

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डीएनए और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बने अहम सबूत

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में 22 गवाह पेश किए थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और डीएनए जांच इस केस के सबसे अहम सबूत साबित हुए।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने दुष्कर्म के बाद चाकू से कई वार किए थे, जिससे बच्ची की मौत हो गई। आरोपी के घर से खून से सने कपड़े और वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद किया गया था।

मां और बहन को भी मिली सजा

मामले में आरोपी की मां बसंती निहाले और बहन चंचल भालसे को भी अदालत ने दोषी माना था। जांच में सामने आया था कि दोनों ने आरोपी की मदद करते हुए वारदात को छिपाने की कोशिश की थी।

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अदालत ने इस आधार पर दोनों को दो-दो साल की सजा सुनाई थी।

अब इस मामले में अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही होगा। फिलहाल शीर्ष अदालत ने फांसी की सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है, जिसके बाद पूरे प्रदेश की नजरें इस केस की अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।





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