हाइलाइट्स
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हरदा में भारतीय किसान संघ का सांकेतिक धरना, मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन
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गेहूं 2700 और मक्का 2400 रुपये/क्विंटल पर खरीदी की मांग
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15–20 मार्च तक मूंग सिंचाई के लिए नहरों में पानी देने की अपील
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मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदेशस्तरीय आंदोलन की चेतावनी
Harda Farmers Protest : हरदा। हरदा में भारतीय किसान संघ ने शुक्रवार को जिला मुख्यालय स्थित कृषि उपज मंडी में एक दिवसीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान संघ ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम अशोक कुमार डेहरिया को ज्ञापन सौंपकर किसानों से जुड़ी कई अहम मांगें रखीं।
संघ के जिलाध्यक्ष महेश शर्मा ने बताया कि आगामी गेहूं खरीदी 2700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से की जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में किसानों को गेहूं का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
इसके साथ ही मक्का की समर्थन मूल्य पर खरीदी 2400 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने की मांग भी रखी गई, क्योंकि अभी मक्का औने-पौने दामों पर खरीदी जा रही है।
मूंग की सिंचाई और सिंचाई परियोजनाओं की मांग
किसानों ने ग्रीष्मकालीन मूंग फसल की सिंचाई के लिए 15 से 20 मार्च तक नहरों में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की मांग की।
इसके अलावा मोरंड–गंजाल संयुक्त सिंचाई परियोजना को शीघ्र प्रारंभ करने और तवा सिंचाई परियोजना से वंचित किसानों को शहीद इलाप सिंह परियोजना से जोड़ने की भी मांग की गई।
खाद और बीज व्यवस्था पर जोर
संघ ने मांग की कि ई-टोकन व्यवस्था के तहत खाद वितरण में को-ऑपरेटिव सोसायटी को प्राथमिकता दी जाए, ताकि किसानों को शून्य ब्याज का लाभ मिल सके।
साथ ही कृषि विभाग द्वारा किसानों को उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराने की भी अपील की गई।
इसके अलावा रहटगांव, सिराली और हंडिया तहसील में गोडाउन बनाकर खाद विक्रय केंद्र खोलने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
फसल नुकसान का मुआवजा और बीमा राशि देने की मांग
भारतीय किसान संघ ने जिले में रबी सीजन के दौरान ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से खराब हुई फसलों की क्षतिपूर्ति और फसल बीमा राशि तत्काल जारी करने की भी मांग उठाई।
मांगें नहीं मानी तो आंदोलन की चेतावनी
संघ के जिला प्रवक्ता राजनारायण गौर ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो संगठन प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
बड़ी संख्या में किसान रहे मौजूद
इस प्रदर्शन में जिलाध्यक्ष महेश शर्मा के साथ हरिशंकर सारण, रामकृष्ण मुकाती, विनोद पाटिल, आनंद राम किरार, विजय मलगाया, राजेंद्र बांके, श्याम पाटिल, ब्रज मोहन राठौर, दीपचंद नवाद, बालक दास छापरे, विष्णु गौर और बालकृष्ण मलगाया सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और किसान उपस्थित रहे।