- 1 अप्रैल से बिजली दरों में 10% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव
- बिजली कंपनियों ने आयोग को भेजा टैरिफ संशोधन प्रस्ताव
- बढ़ती उत्पादन और संचालन लागत का दिया हवाला
- अंतिम फैसला विद्युत विनियामक आयोग करेगा
बढ़ती लागत का हवाला
बिजली कंपनियों का कहना है कि उत्पादन लागत, रखरखाव खर्च और अन्य संचालन व्यय लगातार बढ़ रहे हैं। मौजूदा दरों पर काम करना मुश्किल हो रहा है, इसलिए टैरिफ में संशोधन जरूरी है। कंपनियों ने इसी आधार पर नई दरों का प्रस्ताव तैयार कर आयोग को भेजा है।
हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। आयोग स्तर पर प्रस्ताव पर विस्तृत सुनवाई और प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उपभोक्ताओं, उद्योगों और किसानों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के बाद ही नई दरों को मंजूरी दी जाएगी।
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आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा असर
यदि टैरिफ बढ़ोतरी को हरी झंडी मिलती है, तो इसका सीधा असर आम लोगों के मासिक बिजली बिल पर पड़ेगा। घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यावसायिक और औद्योगिक श्रेणियों में भी दरों में बदलाव संभव है।
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ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संतुलित निर्णय लेने की कोशिश की जाएगी, ताकि बिजली कंपनियों की आर्थिक स्थिति सुधरे और उपभोक्ताओं पर अनावश्यक बोझ न पड़े। फिलहाल सभी की नजर आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी है।