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MP Teacher Vacancy : एमपी के स्कूलों में 40% शिक्षक पद खाली, शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

हाइलाइट्स

  • मध्य प्रदेश में शिक्षकों के 1,15,678 पद खाली
  • 40% पद रिक्त, कई स्कूलों में सिर्फ 1 या 2 शिक्षक
  • 5735 प्राथमिक स्कूल जर्जर भवन में संचालित
  • हजारों स्कूलों में शौचालय की सुविधा नहीं
  • सबसे ज्यादा एकल शिक्षक स्कूल धार जिले में

MP Teacher Vacancy : मध्यप्रदेश।  मध्यप्रदेश में स्कूलों की स्थिति को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। विधानसभा में शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य में शिक्षकों के 1 लाख 15 हजार 678 पद खाली हैं। यह कुल स्वीकृत पदों का करीब 40 प्रतिशत है।

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कितने पद स्वीकृत और कितने भरे?

स्कूल शिक्षा विभाग में कुल 2,89,005 पद स्वीकृत हैं।
इनमें से 1,74,419 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 1,15,678 पद खाली हैं।

स्कूल स्तर पर स्थिति

  • प्राथमिक विद्यालय: 1,33,576 पद में से 55,626 रिक्त

  • माध्यमिक विद्यालय: 1,10,883 पद में से 44,546 रिक्त

  • उच्च माध्यमिक विद्यालय: 44,546 पद में से 15,506 रिक्त

यह जानकारी शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल पर दी।

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एक शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या ज्यादा

प्रदेश में कुल 83,514 स्कूल हैं।
इनमें

  • 1,968 स्कूलों में केवल एक शिक्षक है

  • 46,417 स्कूलों में सिर्फ दो शिक्षक हैं

एक शिक्षक वाले स्कूल सबसे ज्यादा धार जिले में हैं, जहां 144 ऐसे स्कूल हैं।

स्कूल शिक्षा 19Feb 2026 (1)

जर्जर भवन और शौचालय की कमी

राज्य में 5,735 प्राथमिक विद्यालय जर्जर हालत में चल रहे हैं।

इसके अलावा

  • 1,725 स्कूलों में लड़कों के लिए शौचालय नहीं

  • 1,784 स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं

  • उच्च माध्यमिक स्कूलों में 75 बालक और 43 बालिका शौचालय नहीं हैं

जर्जर स्कूल सबसे ज्यादा झाबुआ (618) और धार (550) में हैं।

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20 से कम बच्चों वाले स्कूल भी हजारों

शिक्षा विभाग के अनुसार

  • 11,889 स्कूलों में 20 से कम छात्र हैं

  • इनमें कुल 1,48,817 छात्र और 23,873 शिक्षक हैं
    यानी औसतन हर स्कूल में 13 छात्र और 2 शिक्षक

जनजाति कार्य विभाग के 3,773 स्कूलों में 51,230 छात्र और 7,490 शिक्षक हैं।

20 से कम छात्रों वाले स्कूलों की संख्या सिवनी, रायसेन, रीवा और धार जिलों में सबसे ज्यादा है।

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क्या कहती है सरकार?

सरकार का कहना है कि “एक शाला एक परिसर” योजना के तहत 22,973 परिसरों में 49,477 स्कूलों का विलय किया गया है।

हालांकि विपक्ष का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में शिक्षक पद खाली होने और बुनियादी सुविधाओं की कमी से बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है।







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