हाइलाइट्स
- गर्भवती को एम्बुलेंस नहीं मिली, पैदल चलते वक्त सड़क पर प्रसव।
- चौकीदारऔर दाई ने मोबाइल की रोशनी और तिरपाल में कराई डिलेवरी।
- 3 घंटे तक मां-बच्ची सड़क पर करते रहे एम्बुलेंस का इंतजार।
Vidisha Roadside Delivery : विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा में एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन की पोल खोलती वीडियो सामने आई है। कई बार कॉल किये जाने के बाद भी एम्बुलेंस नहीं पहुंची, तो महिला ने सड़क पर ही बच्ची को जन्म दिया। गनीमत यह रही कि, बच्ची और महिला दोनों ही सुरक्षित है, लेकिन यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था के बड़े-बड़े दावों की पोल खोल रही है। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
ये है पूरा मामला
घटना गुरुवार रात करीब 12 बजे की है। विदिशा के पठारी इलाके के छपारा गांव में संध्या (पति संजय आदिवासी) को लेबर पेन शुरू हुआ। परिजनों ने 108 एम्बुलेंस और जननी एक्सप्रेस को कई बार फोन किया। हर बार कहा गया कि गाड़ी थोड़ी देर में पहुंचेगी। घंटों बीत गए, लेकिन कोई एम्बुलेंस नहीं आई।
पैदल निकले, रास्ते में दर्द बढ़ा
स्थिति बिगड़ती देख परिजन संध्या को पैदल ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने निकल पड़े। यह केंद्र गांव से सिर्फ 3 किलोमीटर दूर है। रास्ते में गढ़ी मोहल्ला के पास संध्या को बहुत तेज दर्द हुआ। परिवार ने उसे सड़क किनारे लिटा दिया।
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मोबाइल टॉर्च और सिगड़ी से प्रसव
कड़ाके की ठंड में पति संजय मोबाइल की टॉर्च जलाकर खड़ा रहा। महिला को ठंड से बचाने के लिए सिगड़ी जलाई गई। प्लास्टिक की तिरपाल ओढ़ा दी गई। पठारी की चौकीदार हरी बाई मौके पर पहुंचीं। उन्होंने स्थानीय दाई राजबाई को बुलाया। दोनों ने मिलकर सुरक्षित प्रसव कराया।
स्थानीय ने कार से पहुंचाया अस्पताल
रात करीब 3 बजे बच्ची का जन्म हुआ। तब तक भी एम्बुलेंस नहीं आई थी। स्थानीय निवासी संजय जैन ने अपनी कार लेकर मदद की। मां और नवजात बच्ची को अस्पताल पहुंचाया। नाल जुड़ी होने के कारण पहले नाल काटी गई।
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परिवार का गुस्सा
संजय आदिवासी ने कहा, अगर समय पर एम्बुलेंस आ जाती तो पत्नी को सड़क पर यह पीड़ा नहीं सहनी पड़ती। उन्होंने बताया कि 108 पर 3 बार फोन किया। कॉल 15-15 मिनट होल्ड पर रखी गई। 112 पर फोन किया तो कहा गया – एम्बुलेंस का नंबर ले लो, हम अभी नहीं आ पाएंगे।
सीएमएचओ ने कहा – जांच होगी
सीएमएचओ रामहित कुमार ने बताया कि पठारी के पास कुरवाई और त्योंदा में एम्बुलेंस उपलब्ध हैं। वे पहुंच सकती थीं। कहां लापरवाही हुई, इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले भी जिले में एम्बुलेंस लापरवाही पर 10 हजार जुर्माना लगा था।