Sandhya Chhaya Old Age Home : भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार 24 जनवरी को भोपाल में प्रदेश का पहला पेड लग्जरी वृद्धाश्रम ‘संध्या-छाया’ का लोकार्पण किया। यह वृद्धाश्रम पत्रकार कॉलोनी लिंक रोड नंबर 3 पर 5 एकड़ जमीन पर 24 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय ‘स्पर्श मेला-2026’ के विजेताओं को पुरस्कृत किया और सिंगल क्लिक के जरिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन हितग्राहियों को 327 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए।
लग्जरी वृद्धाश्रम में मिलेंगी ये सुविधाएं
‘संध्या-छाया’ में 56 वरिष्ठजनों की क्षमता है। इसमें 12 सिंगल और 22 डबल बेड वाले कुल 34 कमरे हैं। हर कमरे में एसी, टीवी, फ्रिज, गर्म-ठंडा पानी, निजी बालकनी, कॉल बेल, इंटरकॉम और टेलीफोन की सुविधा है।
भवन में फिजियोथैरेपी सेंटर, डॉक्टर परामर्श, आपातकालीन चिकित्सा, लाइब्रेरी, मनोरंजन कक्ष, ओपन मेस, डाइनिंग हॉल और विशेष पाथ-वे बनाए गए हैं। सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी गार्ड भी तैनात हैं।
यहां देखिये कमरे का कीमत
इस वृद्धाश्रम का संचालन दो वर्षों के लिए सेवा भारती मध्य भारत को सौंपा गया है। वरिष्ठजनों को कमरे के आकार के अनुसार मासिक शुल्क देना होगा:
- डबल बेड 60 स्क्वे. मीटर – ₹39,490
- डबल बेड 90 स्क्वे. मीटर – ₹43,490
- डबल बेड 56.5 स्क्वे. मीटर – ₹38,490
- सिंगल बेड 49.2 स्क्वे. मीटर – ₹49,990
- सिंगल बेड 35 स्क्वे. मीटर – ₹47,990
- सिंगल बेड 33.5 स्क्वे. मीटर – ₹45,990
‘संध्या-छाया’ आर्थिक रूप से सक्षम वरिष्ठजनों के लिए
प्रदेश में पहले से 83 नि:शुल्क वृद्धाश्रम संचालित हैं, जहां लगभग 2,300 वृद्धजन रहते हैं। वहाँ रहना, भोजन, वस्त्र और स्वास्थ्य सुविधाएँ पूरी तरह मुफ्त हैं।
‘संध्या-छाया’ आर्थिक रूप से सक्षम वरिष्ठजनों के लिए नई पहल है। सरकार भविष्य में PPP मॉडल पर और सशुल्क वृद्धाश्रम शुरू करने की दिशा में नई नीति बना रही है।
क्या बोले सीएम मोहन यादव
मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में वृद्धजनों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन देना जरूरी है। यह वृद्धाश्रम अकेलेपन से जूझ रहे बुजुर्गों के लिए नया आसरा बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई कॉलोनी कटती है और कॉलोनाइजर वहां वृद्धाश्रम भी बनाए तो स्वागत है।
कार्यक्रम में निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, परशुराम कल्याण बोर्ड अध्यक्ष विष्णु राजौरिया और विभाग की प्रमुख सचिव सोनाली वायंणकर भी मौजूद थीं।