Outsourced Recruitment Ban : भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी विभागों में आउटसोर्स भर्ती को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब किसी भी विभाग को आउटसोर्स के माध्यम से कर्मचारियों की भर्ती करने से पहले वित्त विभाग से पूर्व अनुमति (परमिशन) लेनी अनिवार्य होगी। बिना अनुमति के की गई भर्ती अमान्य मानी जाएगी।
वित्त विभाग ने जारी किया आदेश
वित्त विभाग ने हाल ही में एक नया आदेश जारी किया है, जिसमें 31 मार्च 2023 को जारी किए गए पुराने निर्देश को पूरी तरह निरस्त (रद्द) कर दिया गया है। उस पुराने आदेश में विभागों को अपनी सुविधानुसार चतुर्थ श्रेणी के पदों पर तात्कालिक जरूरत के आधार पर आउटसोर्स से भर्ती करने की छूट दी गई थी। अब यह छूट खत्म हो गई है।
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मुख्य बदलाव क्या हैं?
चतुर्थ श्रेणी (क्लास-IV) के पदों पर आउटसोर्स भर्ती अब नहीं हो सकेगी।
इन पदों की भर्ती कर्मचारी चयन मंडल (MP Employees Selection Board) के माध्यम से ही नियमित रूप से होगी।
अन्य श्रेणियों में भी आउटसोर्स भर्ती के लिए वित्त विभाग से बजट स्वीकृति और जरूरत की प्रमाणिकता साबित करनी होगी।
यह फैसला सरकारी कर्मचारियों की मांगों और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। कर्मचारी संगठनों ने लंबे समय से आउटसोर्स भर्ती के विरोध में आवाज उठाई थी, क्योंकि इससे नियमित पदों पर असर पड़ता है और कर्मचारियों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है।
पुराने आदेश अब प्रासंगिक नहीं
वित्त विभाग ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पुराने आदेश अब प्रासंगिक नहीं हैं। नए नियमों के तहत भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
यह फैसला प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और आउटसोर्स पर निर्भर लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। कर्मचारी संगठनों ने इसे स्वागतयोग्य बताया है, लेकिन कुछ विभागों में जहां तात्कालिक जरूरत है, वहां चुनौतियां बढ़ सकती हैं।