हाइलाइट्स
- धार -भोजशाला में सूर्योदय के साथ बसंत पंचमी यज्ञ शुरू हुआ।
- सुप्रीम कोर्ट से मिले निर्देशों के बाद हिन्दू पक्ष करेगा अखंड पूजा ।
- मुस्लिम पक्ष को 1 से 3 के बीच सीमित संख्या में निश्चित जगह पर पढ़ने दी जाएगी नमाज ।
Bhojshala Basant Panchami 2026 : धार। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला (कमल मौला मस्जिद परिसर) आज बसंत पंचमी के मौके पर सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट के कल (22 जनवरी 2026) के फैसले के बाद यहां सूर्योदय से अखंड पूजा शुरू हो गई है। हिंदू भक्त मां सरस्वती (वाग्देवी) की आराधना में जुटे हैं और दिनभर हवन-पूजन का सिलसिला जारी रहेगा।
1 बजे से 3 बजे तक जुमे की नमाज
सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्ष को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा की पूरी अनुमति दी है, जबकि मुस्लिम पक्ष को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जुमे की नमाज पढ़ने की इजाजत है।
कोर्ट ने प्रशासन को दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग जगह तय करने, विशेष पास व्यवस्था करने और शांति बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए थे। दोनों पक्षों से आपसी सम्मान और सहयोग की अपील की गई है।
अखंड ज्योति प्रज्वलित और हवन-पूजन शुरू
सुबह से ही भोजशाला परिसर में बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। सूर्योदय के साथ ही अखंड ज्योति प्रज्वलित की गई और हवन-पूजन शुरू हुआ। मां सरस्वती की आराधना के लिए भक्त फूल, चंदन और मंत्रोच्चार के साथ पूजा कर रहे हैं। दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज पढ़ी जाएगी, जिसके लिए सीमित संख्या में मुस्लिम श्रद्धालुओं को अनुमति है।
धार छावनी में तब्दील
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। धार जिले को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। कुल 8000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं, जिसमें 13 एसपी रेंज के अधिकारी, 25 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, 67 एसडीओपी/नगर पुलिस अधीक्षक, 107 नगर निरीक्षक, 393 उपनिरीक्षक/सहायक निरीक्षक और 933 महिला पुलिसकर्मी शामिल हैं। इसके अलावा 8 RAF प्लाटून और CRPF की टीमें भी मौजूद हैं। भोजशाला क्षेत्र में 300 मीटर का नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है।
भोजशाला का विवाद दशकों पुराना
यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर आई है। कोर्ट ने प्रशासन को शांति बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है और दोनों समुदायों के लोग कोर्ट के फैसले का सम्मान कर रहे हैं।
भोजशाला का विवाद दशकों पुराना है। हिंदू इसे मां सरस्वती का मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमल मौला मस्जिद कहता है। ASI संरक्षित यह स्थल 11वीं शताब्दी का है। आज का आयोजन 10 साल बाद पूजा और नमाज एक साथ होने का है, जो कोर्ट के संतुलित फैसले की वजह से संभव हुआ।