हाइलाइट्स
- मध्य प्रदेश में 55 मदरसों में से 29 अभी संचालित।
- संचालित मदरसों में 254 हिंदू बच्चे नामांकित।
- सीएम का आदेश था कि, मदरसों में नहीं होगी गैर-मुस्लिम बच्चों की पढ़ाई।
Hindu Children in MP Madrasas : भोपाल। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में सरकारी रिकॉर्ड ने एक चौंकाने वाली हकीकत सामने ला दी है। यहां कुल 55 मदरसों में से 29 अभी संचालित हैं और इनमें 254 हिंदू बच्चे नामांकित हैं। यह आंकड़ा शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट से सामने आया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 16 अगस्त 2024 को स्पष्ट आदेश दिया था कि मदरसों में गैर-मुस्लिम बच्चों की पढ़ाई नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद ज़मीन पर तैनात अधिकारियों की लापरवाही, सीएम के आदेशों को पलीता लगा रहे हैं।
शिक्षा विभाग की रिपोर्ट में क्या सामने आया?
शिक्षा विभाग ने जांच के बाद पुष्टि की है कि जिले में 26 मदरसे अनुदान न मिलने से बंद हो चुके हैं। बाकी 29 मदरसों में से 8 ऐसे हैं जहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के बच्चे पढ़ते हैं।
इन 8 मदरसों में कुल 254 हिंदू बच्चे और 696 मुस्लिम बच्चे नामांकित हैं। शेष 21 मदरसों में केवल मुस्लिम बच्चे ही पढ़ रहे हैं। विभाग ने इन मदरसों को नोटिस जारी कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
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अंबाह विकासखंड का उदाहरण सबसे बड़ा
अंबाह विकासखंड के खडियार गांव स्थित मदरसा आयशा इस्लामिया में सबसे ज्यादा हिंदू बच्चे पढ़ते हैं। यहां कुल 448 छात्रों में 135 हिंदू बच्चे शामिल हैं। बच्चों और अभिभावकों का कहना है कि पास में यही एक अच्छा स्कूल उपलब्ध है इसलिए वे यहां पढ़ाई करवा रहे हैं।
यह बात RTE कानून के प्रावधानों पर सवाल उठाती है। RTE के अनुसार 1 से 3 किलोमीटर के दायरे में सरकारी स्कूल होना चाहिए। फिर भी ये बच्चे मदरसों में क्यों पढ़ रहे हैं?
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NHRC सदस्य प्रियांक कानूनगो ने उठाए गंभीर सवाल
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने बताया कि मुरैना और शिवपुरी जिलों में सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में लगभग 550 हिंदू बच्चों के दाखिले की शिकायतें मिली हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदू बच्चों को कुरान और इस्लाम से जुड़े विषय पढ़ाकर धर्मांतरण की साजिश रची जा रही है। कानूनगो ने मांग की है कि ऐसे बच्चों को तुरंत सरकारी स्कूलों में भेजा जाए।
मदरसे में 550 हिंदू बच्चों के होने का अर्थ शिक्षा विभाग की नाकामी है।
RTE एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप आबादी से 1 और 3 किलोमीटर में स्कूल खोले गए हैं,सरकारी विभाग जब स्कूल भर्ती अभियान चलाते हैं तो यह हिंदू बच्चे अदृश्य क्यों हो जाते हैं ?
सरकार की नीति बनाने वाले NGO तो… pic.twitter.com/yozxm9SFG6
— प्रियंक कानूनगो Priyank Kanoongo (@KanoongoPriyank) January 7, 2026
मदरसा क्या होता है?
मदरसा अरबी शब्द है जिसका मतलब ‘पढ़ने का स्थान’ है। यहां मुख्य रूप से इस्लामिक शिक्षा दी जाती है। इसमें कुरान, हदीस, तफसीर, फिकह और इस्लामिक इतिहास शामिल होता है। कुछ मदरसों में आधुनिक विषय जैसे गणित, विज्ञान, हिंदी और अंग्रेजी भी पढ़ाए जाते हैं।
जानकारी के मुताबिक, पाठ्यक्रम तीन प्रकार के होते हैं – दीनिया (धार्मिक), आधुनिक और संयुक्त। मदरसों का संचालन एनजीओ, धार्मिक संगठन, दानदाता और निजी स्रोतों से होता है। सरकार भी कुछ मदरसों को अनुदान देती है।
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असली समस्या सिस्टम की विफलता है
यह मुद्दा केवल पाठ्यक्रम या धन का नहीं है। असली समस्या शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की नाकामी है। RTE कानून के तहत हर बच्चे को नजदीकी स्कूल में मुफ्त शिक्षा का अधिकार है। फिर भी हजारों हिंदू बच्चे मदरसों में क्यों पढ़ रहे हैं?
विभाग स्कूल भर्ती अभियान चलाता है, लेकिन ये बच्चे उसमें दिखाई क्यों नहीं देते? क्या सरकारी स्कूलों की कमी या जागरूकता की कमी इसका कारण है? यह सवाल पूरे प्रदेश के सामने खड़ा है।
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विभाग ने क्या कदम उठाए?
शिक्षा विभाग ने मुरैना के मदरसों को नोटिस जारी कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। विभाग का कहना है कि सभी हिंदू बच्चे अभिभावकों की सहमति से शासन द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम पढ़ रहे हैं लेकिन विपक्ष और सामाजिक संगठन इसे गंभीर मानते हैं।
वे मांग कर रहे हैं कि तुरंत जांच हो और हिंदू बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाया जाए। यह मामला शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है।
