Sehore Water Crisis : सीहोर। इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप है, लेकिन सीहोर में ब्रिज कॉर्पोरेशन की लापरवाही जनता को मुश्किल में डाल रही है। हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में रेलवे ओवरब्रिज निर्माण के लिए बिना फिक्स ले-आउट के खुदाई से पेयजल और सीवेज लाइनें बार-बार क्षतिग्रस्त हो रही हैं।
जानकारी के मुताबिक, पिछले 8 दिनों से वार्ड 9 और 21 में नल नहीं खुले। लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। नगर पालिका तीन टैंकरों से काम चला रही है। खुदाई से सीवेज लाइन फूटने से अवधपुरी, चाणक्यपुरी और ड्रीम सिटी में गंदा पानी घरों के बाथरूम-टॉयलेट में लौट रहा है।
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बताया जा रहा है कि, यह पानी बोरिंग में रिस रहा है, जिससे बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। शनिवार को नगर पालिका ने निर्माण एजेंसी का जनरेटर जब्त कर काम रुकवा दिया।
ब्रिज कॉर्पोरेशन की मनमानी
उपयंत्री विजय कोली ने बताया कि ब्रिज कॉर्पोरेशन का ले-आउट फिक्स नहीं है। कभी यहां तो कभी वहां खुदाई करते हैं। पिछले दो महीनों में एक दर्जन बार पेयजल पाइपलाइन डैमेज हुई।
कॉर्पोरेशन ने पाइप शिफ्टिंग के लिए 85 लाख रुपये का एस्टीमेट एक साल पहले मांगा था, लेकिन राशि जमा नहीं की। बिना अनुमति खुदाई जारी रखी। चेतावनी के बावजूद सुधार न होने पर जनरेटर जब्त किया गया।
घरों में गंदा पानी, स्वास्थ्य खतरा
पार्षद प्रतिनिधि कमलेश कुशवाह ने कहा कि सीवेज बैक मारकर घरों में आ रहा है। कीचड़ और गंदा पानी पेयजल लाइन में मिलने का खतरा है। लोग बीमार पड़ रहे हैं। इंदौर जैसी त्रासदी का डर है। जिम्मेदार समन्वय की कमी दिखा रहे हैं।
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प्रशासन की कार्रवाई
नगर पालिका की जल और अतिक्रमण शाखा ने मौके पर पहुंचकर जनरेटर जब्त किया। काम रुकवा दिया। लेकिन लोग 8 दिन से परेशान हैं। टैंकर से पानी भरवाना पड़ रहा है।