हाइलाइट्स
- मध्यप्रदेश सरकार 3500 करोड़ रुपए का नया कर्ज उठाएगी ।
- वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार 12487.78 करोड़ के रेवेन्यू सरप्लस था।
- सरकार का कुल कर्ज 53100 करोड़ तक पहुंचा।
MP GOVT Debt : भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 में एक बार फिर बाजार से कर्ज लिया है। आरबीआई के माध्यम से तीन किस्तों में 3500 करोड़ रुपये का नया लोन उठाया गया है। इससे वित्त वर्ष में कुल कर्ज बढ़कर 53,100 करोड़ रुपये हो गया है।
सरकार का कहना है कि कर्ज तय सीमा के अंदर है और पिछले दो वित्त वर्षों में रेवेन्यू सरप्लस रहा है। वित्तीय स्थिति संतुलित बताई जा रही है। पहले भी अक्टूबर, नवंबर और सितंबर में कई बार कर्ज लिया गया था। कुल राज्य कर्ज अब 4 लाख 55 हजार 200 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है।
तीन किस्तों में कर्ज
पहली किस्त : 1200 करोड़ रुपये, 5 साल की अवधि, भुगतान 31 दिसंबर 2030 तक।
दूसरी किस्त : 1200 करोड़ रुपये, 11 साल की अवधि, भुगतान 31 दिसंबर 2036 तक।
तीसरी किस्त : 1100 करोड़ रुपये, 23 साल की लंबी अवधि।
ब्याज का भुगतान हर छह महीने में होगा। पहले सितंबर में 3000 करोड़, अक्टूबर में 5200 करोड़ और नवंबर में 4000 करोड़ कर्ज लिया गया था।
रेवेन्यू सरप्लस का दावा
सरकार ने कहा कि कर्ज लेने के बावजूद वित्तीय स्थिति मजबूत है। वित्त वर्ष 2023-24 में 12,487.78 करोड़ रुपये का रेवेन्यू सरप्लस रहा। 2024-25 में संशोधित आंकड़ों में 1025.91 करोड़ सरप्लस दर्ज हुआ।
कर्ज तय लोन लिमिट के अंदर है। वित्त वर्ष शुरू में कुल कर्ज करीब 4 लाख 21 हजार करोड़ था, जो अब बढ़कर 4 लाख 55 हजार 200 करोड़ हो गया।
विकास कार्यों के लिए कर्ज
सरकार का कहना है कि कर्ज विकास कार्यों, इंफ्रास्ट्रक्चर और योजनाओं के लिए लिया जा रहा है। रेवेन्यू बढ़ने से भुगतान आसान है। विपक्ष इसे कर्ज का बोझ बढ़ाना बता रहा है, लेकिन सरकार संतुलित बजट का दावा कर रही है।
यह कर्ज राज्य की आर्थिक स्थिति पर चर्चा छेड़ रहा है। विकास और कर्ज के बीच संतुलन जरूरी है। सरकार से अपील है कि पारदर्शिता बनाए रखी जाए।