MP Illegal Sand Mining : नर्मदापुरम। पिपरिया स्टेट हाईवे पर माखननगर स्थित तवा पुल के आसपास बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन हो रहा है। रेत माफिया नियमों को ताक पर रखकर पुल से महज 30 मीटर (करीब 100 फीट) के प्रतिबंधित दायरे से रेत निकाल रहे हैं। दिन में ट्रैक्टर-ट्रॉली और रात में डंपरों से रेत की ढुलाई की जा रही है।
खनिज और राजस्व विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नजर नहीं आ रही। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे पुल के पिलर कमजोर हो सकते हैं और बड़ा हादसा हो सकता है। इसी तरह डोंगरवाड़ा क्षेत्र में भी नर्मदा नदी से अवैध रेत खनन जारी है।
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तवा पुल को खतरा
नियमों के अनुसार, किसी पुल के 100-200 फीट दायरे में रेत खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। गहरे गड्ढे बनने से नदी तल कमजोर होता है और पुल के पिलरों की नींव हिल सकती है। ब्रिज एक्सपर्ट और पीडब्ल्यूडी के सेवानिवृत्त अधिकारी नागेश दुबे ने कहा कि 100 फीट दायरे में खनन की अनुमति नहीं है। गड्ढे बनने से पिलरों की नींव कमजोर होती है और हादसे की आशंका बढ़ जाती है। तवा पुल पर भारी वाहन चलते हैं, ऐसे में खतरा और गंभीर है।
दिन-रात रेत ढुलाई
स्थानीय लोगों का कहना है कि माफिया दिन में ट्रैक्टर और रात में डंपरों से रेत ले जा रहे हैं। यह गतिविधि लंबे समय से चल रही है। पुल के पास गहरे गड्ढे बन गए हैं। विभाग की अनदेखी से माफिया बेखौफ हो गए हैं।
डोंगरवाड़ा में भी अवैध खनन
बुधनी रोड पर खर्राघाट-डोंगरवाड़ा के पास नर्मदा से भी रेत चोरी हो रही है। ट्रैक्टर-ट्रॉली में रेत भरकर बिना रोक-टोक ले जाया जा रहा है। डोंगरवाड़ा खदान में कंपनी उत्खनन नहीं कर रही, फिर भी ढुलाई जारी है। रेत कंपनी की फ्लाइंग स्क्वॉड और खनिज विभाग के अधिकारी नजर नहीं आ रहे।
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विभाग की चुप्पी पर सवाल
लोगों में गुस्सा है कि विभाग कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा। पुल की सुरक्षा और पर्यावरण को खतरा है, लेकिन कोई ध्यान नहीं। मांग की जा रही है कि तुरंत खनन रोका जाए और माफियाओं पर सख्त एक्शन हो।