हाइलाइट्स
- बेटी के सम्मान में संतोष वर्मा पर कड़ी कार्रवाई की मांग।
- सपाक्स पार्टी करेगी हनुमान चालीसा का पाठ।
- संतोष वर्मा के बयान से ब्राह्मण समाज में भारी आक्रोश।
Santosh Verma Controversy : भोपाल। मध्य प्रदेश में IAS अधिकारी संतोष वर्मा के विवादित बयान ने बड़ा सियासी और सामाजिक बवाल खड़ा कर दिया है। संतोष वर्मा ने एक कार्यक्रम में आरक्षण पर बोलते हुए कहा था कि “आरक्षण तब तक जारी रहना चाहिए जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को दान न कर दे या उससे संबंध न बना ले।” इस बयान से ब्राह्मण समाज में भारी आक्रोश है।
सपाक्स (सामान्य, पिछड़ा, अल्पसंख्यक कल्याण समाज) पार्टी ने आज प्रदेश भर के हनुमान मंदिरों में शाम 6 बजे सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन किया है। यह पाठ हनुमानजी से गुहार लगाने और बेटी के सम्मान में संतोष वर्मा पर कड़ी कार्रवाई की मांग के लिए है। सरकार ने पहले ही केंद्र से संतोष वर्मा को निलंबित करने की सिफारिश की थी लेकिन कार्रवाई न होने पर यह विरोध और तेज हो गया है।
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यहां से हुई विवाद की शुरुआत
विवाद की जड़ अजाक्स (अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ) के प्रांतीय अधिवेशन में संतोष वर्मा के बयान से है। वे नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष हैं। आरक्षण को सामाजिक पिछड़ेपन से जोड़ते हुए उन्होंने ब्राह्मण बेटियों का जिक्र किया, जिसे समाज ने अपमानजनक बताया।
बयान का वीडियो वायरल होने के बाद ब्राह्मण संगठनों ने एफआईआर और सख्त कार्रवाई की मांग की। वर्मा ने बाद में माफी मांगते हुए कहा कि उनका बयान तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, लेकिन आक्रोश नहीं थमा।
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सपाक्स पार्टी का विरोध
सपाक्स पार्टी ने इस बयान को महिलाओं और ब्राह्मण समाज का अपमान बताया। पार्टी ने आज शाम 6 बजे हनुमान मंदिरों में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का ऐलान किया। यह पाठ हनुमानजी से न्याय और कार्रवाई की गुहार के लिए है।
सपाक्स नेता हीरालाल त्रिवेदी ने कहा कि बेटी के सम्मान में यह आयोजन है और सरकार से संतोष वर्मा पर तुरंत एक्शन की मांग की। ब्राह्मण समाज के कई संगठन भी इस पाठ में शामिल हो रहे हैं।
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सरकार की कार्रवाई
मध्य प्रदेश सरकार ने 14 दिसंबर को केंद्र से संतोष वर्मा को निलंबित करने की सिफारिश की थी। विवाद बढ़ने पर शो-कॉज नोटिस जारी किया गया और बाद में निलंबन भी हुआ।
अब केंद्र से बर्खास्तगी की सिफारिश भेजी गई है। वर्मा पर फर्जी दस्तावेजों से प्रमोशन के पुराने आरोप भी हैं। सरकार का कहना है कि सेवा नियमों का उल्लंघन हुआ है।
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समाज में आक्रोश
ब्राह्मण समाज और सपाक्स ने बयान को जातिवादी और महिलाओं का अपमान बताया। कई जगह प्रदर्शन हुए और मुंह काला करने पर इनाम की घोषणा तक हुई। विरोधी दल भी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। यह मामला सामाजिक सद्भाव पर सवाल उठा रहा है।