MP Tiger Deaths : भोपाल। देश का टाइगर स्टेट कहलाने वाला मध्यप्रदेश बाघों की मौतों से हिल गया है। साल 2025 में अब तक 54 टाइगरों की मौत हो चुकी है, जो प्रोजेक्ट टाइगर (1973) शुरू होने के बाद एक साल में सबसे ज्यादा है। पिछले एक हफ्ते में ही 6 बाघों की मौत ने सबको चौंका दिया है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि 54 मौतों में से 36 रहस्यमय हैं। कई मामलों में शिकारी पंजे काटकर ले गए, कुछ में कैमरे में शिकारी पकड़े गए। अन्य कारणों में ट्रेन एक्सीडेंट, करंट लगना और टेरिटोरियल फाइट शामिल हैं।
हर साल मौतों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है:
2021 – 34 मौतें
2022 – 43 मौतें
2023 – 45 मौतें
2024 – 46 मौतें
2025 (अब तक) – 54 मौतें
वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे ने चिंता जताई कि वन विभाग को गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। शिकार रोकना, सुरक्षित कॉरिडोर बनाना और शहरों के बढ़ते दायरे से जंगलों को बचाना जरूरी है। ह्यूमन-एनिमल कन्फ्लिक्ट भी बड़ा खतरा बन रहा है।
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सियासत भी गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार और वन विभाग को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि टाइगर संरक्षण सबकी जिम्मेदारी है, लेकिन सरकार शिकार रोकने और जंगलों बचाने में असफल साबित हुई है।
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने जवाब दिया कि प्रदेश को टाइगर स्टेट बनाने में भाजपा की सरकारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। टाइगर्स के जिस तरह से मौत हो रही है वह चिंताजनक है और इस दिशा में सुधार के लिए हर कदम उठाया जाएगा।
वन विभाग हरकत में आ गया है। रहस्यमय मौतों की जांच के लिए डॉग स्क्वायड और पेट्रोलिंग टीमें लगाई गई हैं। हालिया मामला बांधवगढ़ का है, जहां चंदिया वन परिक्षेत्र में कथली नदी के पास एक टाइगर का शव मिला। इलाका सील कर जांच शुरू की गई। विभाग का दावा है कि ज्यादातर मौतें प्राकृतिक कारणों से हुईं, क्योंकि टाइगरों की संख्या बढ़ी है तो नेचुरल डेथ भी ज्यादा हैं।