Adivasi Land Case : भोपाल। विजयराघवगढ़ से बीजेपी विधायक संजय पाठक की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने उनके खिलाफ आदिवासी जमीनों की बेनामी खरीद-फरोख्त के गंभीर आरोपों को संज्ञान में लेते हुए कटनी, जबलपुर, उमरिया, डिंडौरी और सिवनी के जिलाधिकारियों को 5 दिसंबर को सख्त पत्र लिखा है।
आयोग ने कहा है कि विधायक संजय पाठक ने अपने आदिवासी कर्मचारियों के नाम पर बैगा जनजाति की संरक्षित जमीनें धोखे से खरीदी हैं ताकि बाद में बाक्साइट खदानें स्वीकृत कराई जा सकें।
आयोग ने पांचों कलेक्टरों को एक माह के अंदर पूरी जांच रिपोर्ट भेजने को कहा है। अगर समय पर रिपोर्ट नहीं आई तो संविधान के अनुच्छेद 338A की शक्तियों का इस्तेमाल कर कलेक्टरों या उनके प्रतिनिधियों को दिल्ली तलब किया जाएगा।
शिकायत कटनी निवासी दिव्यांशु मिश्रा ‘अंशु’ ने 15 सितंबर को की थी। उनके मुताबिक सिर्फ डिंडौरी जिले में ही 795 एकड़ जमीन चार आदिवासी कर्मचारियों – रघुराज सिंह गौड़, नत्थू कोल, राकेश सिंह गौड़ और प्रहलाद कोल के नाम पर खरीदी गई है।
ये सारी जमीन बजाग तहसील के पिपरिया माल, बघरेली सानी, सरई टोला और हर्रा टोला गांवों में है। कुल मिलाकर पांच जिलों में लगभग 2000 एकड़ से ज्यादा जमीन बेनामी तरीके से हथियाई गई है।
दूसरी तरफ कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखित शिकायत की थी कि डिंडौरी के संरक्षित बैगा बहुल क्षेत्र में 1200 एकड़ से ज्यादा आदिवासी जमीन बेनामी तरीके से हड़पी जा रही है। इस पर मुख्यमंत्री सचिवालय ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जनजातीय कार्य विभाग को निर्देश दिए।
विभाग ने डिंडौरी कलेक्टर को उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। अभी तक सिर्फ डिंडौरी कलेक्टर ने ही आयोग को रिपोर्ट भेजी है। बाकी चार जिलों – कटनी, जबलपुर, उमरिया और सिवनी के कलेक्टरों को आयोग ने अंतिम चेतावनी दे दी है।
Pranjal Sharma : ‘जूनियर एल्विश’ बने भोपाल के प्रांजल शर्मा, वेब सीरीज ‘औकात के बाहर’ में मचाई धूम
कांग्रेस और शिकायतकर्ता का कहना है कि ये सारी जमीनें बाद में बाक्साइट खनन के लिए इस्तेमाल की जानी हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एक महीने में कलेक्टर क्या रिपोर्ट भेजते हैं और NCST आगे क्या कदम उठाता है।