MP Naxalite Surrender : भोपाल। मध्यप्रदेश से माओवाद का आखिरी किला भी आखिरकार ढह गया। देश के सबसे खतरनाक माओवादी नेताओं में शुमार, सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) और एक करोड़ रुपये का इनामी रामधेर मज्जी ने सोमवार तड़के अपने 11 टॉप कमांडरों के साथ हथियार डाल दिए। यह सरेंडर छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के बाकरकट्टा थाना क्षेत्र के कुमही गांव में हुआ। रामधेर ने खुद अपनी AK-47 पुलिस के हवाले की।
उनके साथ DVCM चंदू उसेंडी, ACM ललिता, जानकी, प्रेम, रामसिंह दादा, सुकैश पोट्टम और छह महिला नक्सलियों ने भी INSAS, SLR और .303 राइफलें सौंप दीं। इनमें से कई पर पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों की हत्या के गंभीर आरोप हैं।
यह सरेंडर इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि ठीक 24 घंटे पहले रविवार को ही बालाघाट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में MMC के कान्हा-भोरादेव (KB) डिवीजन के 10 बड़े नक्सलियों ने ₹2.36 करोड़ के इनाम के साथ सरेंडर किया था। इनमें सुरेंद्र उर्फ कबीर सोड़ी, राकेश ओड़ी, लालसिंह मरावी जैसे नाम शामिल थे।
29 नवंबर को ही महाराष्ट्र के गोंदिया में हॉक फोर्स इंस्पेक्टर आशीष शर्मा की हत्या में शामिल अनंत उर्फ विकास नागपुरे ने 11 नक्सलियों के साथ सरेंडर किया था। उसने जाते-जाते अपने चार साथियों को रामधेर से संपर्क करने और उसे सरेंडर के लिए मनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। यही वजह रही कि रामधेर पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया और आखिरकार उसने भी हथियार डाल दिए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को ही ऐलान किया था कि “यह मध्यप्रदेश पुलिस के नक्सल-विरोधी अभियान की सबसे बड़ी जीत है। डिंडौरी और मंडला पहले ही नक्सल-मुक्त हो चुके हैं, अब बालाघाट भी लगभग मुक्त हो गया। हमारी नीति है – सरेंडर करो या समाप्त हो जाओ।”
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2025 में अब तक मध्यप्रदेश पुलिस ने टारगेटेड ऑपरेशनों में 10 खतरनाक नक्सलियों का एनकाउंटर किया है, जिन पर कुल 1.86 करोड़ रुपये का इनाम था।
रामधेर के सरेंडर के बाद मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ (MMC) जोन का पूरा माओवादी ढांचा खत्म हो गया है। कान्हा टाइगर रिजर्व, बांधवगढ़ और पूरे जंगल कॉरिडोर की सुरक्षा अब पूरी तरह मजबूत हो गई है।