Omkareshwar News : मध्य प्रदेश। तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में सोमवार को कुछ ऐसा हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ। पूरा शहर सुबह से शाम तक पूरी तरह बंद रहा। ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट के विरोध में स्थानीय लोगों ने तीन दिवसीय ऐच्छिक बंद बुलाया था, और इसका पहला दिन सौ फीसदी सफल रहा। न दुकानें खुलीं, न होटल-रेस्टोरेंट चले, न ऑटो-टैक्सी चली और न ही नर्मदा में नावें चलीं।
सोमवार को ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए करीब 35 हजार श्रद्धालु पहुंचे, लेकिन उन्हें भारी परेशानी हुई। नए बस स्टैंड से मंदिर तक दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। न प्रसादी मिली, न चाय-नाश्ता और न ही भोजन।
ठहरने की जगह भी नहीं मिली क्योंकि सारे लॉज-होटल बंद थे। सिर्फ मंदिर परिसर के अंदर के स्टॉल और प्रसादालय से ही कुछ लोगों को प्रसाद और खाना मिल सका। बहुत से भक्त बिना पूजन सामग्री के ही दर्शन करके लौट गए। ब्रह्मपुरी घाट, झूला पुल, नागर घाट, जेपी चौक सब सूने रहे।
लोगों की मांग है कि 120 करोड़ रुपये का ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट मूल जगह से हटाकर कहीं और बनाया जाए। इस प्रोजेक्ट में 189 मकान, 184 दुकानें, 10 आश्रम, 15 गेस्ट हाउस और कई प्राचीन मंदिर-मठ प्रभावित हो रहे हैं। खास बात यह है कि 1954 के सरकारी रिकॉर्ड में ब्रह्मपुरी को ओंकारेश्वर की सबसे पुरानी बस्ती बताया गया है। स्थानीय लोग इसे बचाना चाहते हैं।
ममलेश्वर लोक में शिखर दर्शन दीर्घा, भक्ति मार्ग, शिवपुराण की मूर्तियां, रेवा दर्शन प्रांगण, विंध्य वाटिका और डिजिटल संस्कृति केंद्र बनने हैं। यह उज्जैन सिंहस्थ-2028 की तैयारी का हिस्सा है और दिसंबर 2027 तक पूरा करना है। इसके लिए 4.6 हेक्टेयर जमीन चाहिए, जिसमें ब्रह्मपुरी घाट रोड से जूना अखाड़ा तक के सारे पक्के मकान-दुकानें हटाई जाएंगी।
इससे पहले विरोधी प्रतिनिधि मंडल विधायक नारायण पटेल के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी मिल चुका है। मांगें पूरी न होने पर तीन दिन का बंद बुलाया गया। पहला दिन पूरी तरह असरदार रहा। अब मंगलवार और बुधवार को भी बंद रहेगा।
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खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने कहा कि प्रशासन बातचीत कर रहा है। एडीएम और पुनासा एसडीएम लोगों से बंद खत्म करने की अपील कर रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। देखना यह है कि अगले दो दिन में कोई हल निकलता है या तीर्थनगरी में सन्नाटा और दो दिन बना रहेगा।