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MP News : नर्मदापुरम कमिश्नर और कलेक्टर ने ली भावांतर योजना की खरीदी पर नजर, किसानों से की सीधी बात

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MP News : बैतूल। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम संभाग के कमिश्नर कृष्ण गोपाल तिवारी और बैतूल जिला कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने गुरुवार को बैतूल कृषि उपज मंडी का सरप्राइज विजिट किया। भावांतर भुगतान योजना के तहत सोयाबीन और मक्का की खरीदी प्रक्रिया की बारीकी से पड़ताल की गई। इन दिनों मंडी में किसानों की खासी भीड़ देखी जा रही है, क्योंकि खरीफ फसल की उपज बिक्री का सीजन जोरों पर है।

अधिकारियों ने न सिर्फ प्रक्रिया का जायजा लिया, बल्कि किसानों और व्यापारियों से सीधे फीडबैक भी लिया। यह निरीक्षण किसानों के हितों की रक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रहा है।

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निरीक्षण के दौरान कमिश्नर तिवारी ने विशेष रूप से किसानों से बातचीत की। उन्होंने पूछा कि क्या मंडी में कोई अनुचित व्यवहार या समस्या तो नहीं हो रही? क्या खरीदी में देरी या गुणवत्ता जांच में कोई कमी तो नहीं?

एक किसान ने बताया, “सब कुछ सुचारू चल रहा है, लेकिन कभी-कभी भीड़ ज्यादा होने से लाइन लग जाती है।” कमिश्नर ने आश्वासन दिया कि ऐसी दिक्कतों को तुरंत दूर किया जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने मंडी में आने वाले अनाज की गुणवत्ता का खुद परीक्षण किया।

कुछ बैग खोलकर नमूने चेक किए और व्यापारियों को निर्देश दिए कि न्यूनतम मानकों का पालन अनिवार्य है। मौके पर ही एक व्यापारी को खुले में बोली लगाते हुए पाया गया, जिस पर तुरंत चेतावनी दी गई। कलेक्टर सूर्यवंशी ने कहा, “भावांतर योजना किसानों की आय दोगुनी करने का माध्यम है। हम इसे पूरी पारदर्शिता से लागू करेंगे।”

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निरीक्षण में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, उप संचालक कृषि और बैतूल एसडीएम भी मौजूद रहे। उन्होंने खरीदी प्रक्रिया के हर चरण – वजन, नमूना लेना, भुगतान- का अवलोकन किया। बैतूल जिले में सोयाबीन की खरीदी मुख्य रूप से भावांतर योजना के तहत हो रही है, जहां किसानों को समर्थन मूल्य और बाजार मूल्य के अंतर की राशि सीधे खाते में ट्रांसफर की जाती है।

मक्का की खरीदी भी इसी योजना के दायरे में चल रही है। जिले में अब तक हजारों क्विंटल सोयाबीन की खरीद हो चुकी है, जिससे किसानों को करोड़ों का लाभ पहुंचा है। लेकिन कभी-कभी गुणवत्ता विवाद या भीड़ प्रबंधन की समस्या सामने आती है, जिसे आज के निरीक्षण में संबोधित किया गया।

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भावांतर योजना मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी स्कीम है, जो 2017 से चल रही है। इस तहत किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी मिलती है, बिना भंडारण की झंझट के। बैतूल जैसे कृषि प्रधान जिले में यह योजना वरदान साबित हो रही है, जहां सोयाबीन की पैदावार प्रति हेक्टेयर 20-25 क्विंटल तक होती है।

कमिश्नर तिवारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मंडी में डिजिटल वजन मशीनों का सही उपयोग हो और भुगतान 48 घंटे के अंदर हो। एक व्यापारी ने बताया, “अधिकारियों का आना अच्छा लगा। इससे हमें भी सतर्क रहना पड़ता है।” निरीक्षण के बाद कमिश्नर ने एक छोटी बैठक भी की, जिसमें आगे की खरीदी के लिए टिप्स दिए गए।

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