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MP News : रायसेन में किसान ने उगाई शुगर फ्री जैविक धान, बिना खाद-कीटनाशक 120 दिन रही रोगमुक्त

Farmer in Raisen grows sugar-free organic rice

MP News : रायसेन। मध्य प्रदेश का रायसेन जिला धान की खेती के लिए जाना-पहचाना नाम है, जहां की फसलें दूसरे राज्यों और देशों में भी अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। लेकिन अब यहां के किसान पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। जिला मुख्यालय से महज तीन किलोमीटर दूर मोहनिया गांव के युवा किसान अनिल शर्मा ने एक अनोखी कोशिश की है। उन्होंने शुगर-फ्री जैविक धान की फसल उगाई है, जो पूरी तरह रासायनिक खाद और कीटनाशकों से मुक्त है।

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यह धान उत्तराखंड से मंगाए गए विशेष बीजों से तैयार किया गया है और इसकी बालियां तो बाहर से काली दिखती हैं, लेकिन अंदर से निकलने वाला चावल सफेद और पौष्टिक होता है। किसान अनिल का यह प्रयोग न सिर्फ लागत बचत का उदाहरण है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी मील का पत्थर साबित हो सकता है।

अनिल शर्मा ने बताया कि उन्होंने इसकी किस्म ‘पूसा नरेंद्र (काला नमक)’ के बीज उत्तराखंड से 500 रुपये प्रति किलो की दर से मंगाए थे। यह धान 120 दिनों में पककर तैयार हो जाता है।

सबसे खास बात यह है कि पूरी फसल में एक बार भी कीटनाशक का छिड़काव न करने के बावजूद यह पूरी तरह रोगमुक्त रही। इसकी प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता इतनी मजबूत है कि कीड़े-मकोड़ों या बीमारियों ने इसे छुआ तक नहीं।

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रासायनिक खाद और दवाओं का इस्तेमाल न करने से प्रति एकड़ 10 से 15 हजार रुपये की बचत हुई। अनिल ने शुरुआत में सिर्फ 5 किलो बीज मंगाकर दो एकड़ रकबे में रोपाई की थी। अब कटाई का समय आ गया है और फसल लहलहा रही है। उन्होंने कहा, “यह चावल शुगर-फ्री है, यानी मधुमेह के मरीजों के लिए आदर्श। बाजार में इसकी कीमत आम धान से दोगुनी-तिगुनी हो सकती है। अगले सीजन में हम 10 एकड़ तक इसका विस्तार करेंगे।”

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अनिल ने बताया कि इस फसल की पैदावार औसत से ज्यादा रही और बाजार में स्वास्थ्य लाभ बताकर इसे प्रीमियम दाम पर बेचने की योजना है। राज्य सरकार की जैविक खेती को बढ़ावा देने वाली योजनाओं का भी फायदा मिल सकता है। हालांकि, चुनौतियां भी हैं – जैसे बीज की ऊंची कीमत और बाजार तक पहुंच। अनिल कहते हैं, “शुरुआत मुश्किल लगी, लेकिन जैविक तरीके से खेती ने न सिर्फ पैसे बचाए, बल्कि परिवार को स्वस्थ भोजन भी दिया।”

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