MP News : रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के हतनारा गांव में एक मासूम की मौत ने सबके दिल दहला दिए। 4 साल के माधव की जान चली गई। परिवार का आरोप है कि गांव के झोलाछाप डॉक्टर ने एक्सपायरी सिरप और गोली देकर उसकी जान ली। 20 दिनों तक जिंदगी से जूझने के बाद सोमवार को माधव ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कार्रवाई की। आरोपी डॉक्टर के क्लिनिक पर छापा मारा। वहां पुरानी दवाइयां जब्त की गईं। डॉक्टर पहले ही गिरफ्तार हो चुका है।
माधव के पिता भंवरलाल ने बताया कि 14 अक्टूबर की रात को बेटे को तेज बुखार चढ़ आया। गांव में डॉक्टर न होने से वे रात में ही नजदीकी क्लिनिक पहुंचे। वहां झोलाछाप डॉक्टर ने दो सिरप और एक गोली थमा दी। सुबह होते ही माधव की हालत बिगड़ गई। सांस लेने में दिक्कत हुई।
परिवार ने पहले रतलाम के निजी अस्पताल ले जाकर महंगा इलाज करवाया। फिर इंदौर रेफर किया। लेकिन गरीबी के कारण वे रतलाम मेडिकल कॉलेज पहुंचे। वहां 20 दिनों तक वेंटिलेटर पर रहा। आखिरकार सोमवार को डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
भंवरलाल ने गुस्से में कहा, “मैंने दवाओं का फोटो मोबाइल में ले लिया था। गोली एक्सपायरी डेट की निकली। सिरप पीने के बाद ही बेटे की तबीयत ज्यादा खराब हुई। डॉक्टर को फोन किया तो बहाने बनाता रहा।” परिवार ने झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि गांव में असली डॉक्टर न होने से मजबूरन ऐसा करना पड़ा। लेकिन लापरवाही ने मासूम की जान ले ली। माधव दो भाई-बहनों में सबसे छोटा था। उसके जाने से घर में सन्नाटा पसर गया।
पिपलोदा बीएमओ डॉ. पवन पाटीदार ने बताया कि 14 अक्टूबर को ही घटना की जानकारी मिली। तुरंत पुलिस थाने में केस दर्ज कराया गया। झोलाछाप डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया। सोमवार को क्लिनिक पर छापा मारा। वहां एक्सपायरी सिट्राजिन टैबलेट के पैकेट और कई सिरप जब्त किए।
डॉ. पाटीदार ने कहा, “यह क्लिनिक बिना लाइसेंस चल रहा था। दवाओं की जांच लैब भेजी। रिपोर्ट आने पर आगे कार्रवाई होगी।” स्वास्थ्य टीम ने आसपास के गांवों में सर्वे शुरू कर दिया। झोलाछापों की सूची बनाई जा रही।
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रतलाम मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ डॉक्टर प्रदीप मिश्रा ने बताया कि माधव को दिमाग में सूजन थी। किडनी और लीवर ठीक थे। लेकिन मौत का सटीक कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से ही पता चलेगा। उन्होंने कहा, “गलत दवा से एलर्जी या संक्रमण फैल सकता है। ग्रामीण इलाकों में जागरूकता जरूरी।” डॉ. मिश्रा ने अपील की कि बुखार होने पर तुरंत सरकारी अस्पताल जाएं। झोलाछापों डॉक्टर्स से इलाज न कराएं।