Chhath Puja 2025 : मध्य प्रदेश। दीपावली की रौशनी के बाद अब इंदौर में छठ पूजा की आध्यात्मिक ज्योति जल उठी है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लाखों परिवार इस महापर्व की तैयारियों में जुट गए हैं। शहर की गलियों में केलवा के पात पर उगेल भइल सुरजदेव जैसे छठ गीत गूंज रहे हैं। इंदौर छठमय हो गया है। करीब ढाई से तीन लाख श्रद्धालु इस बार पर्व में शामिल होंगे। शहर के 150 से ज्यादा घाटों पर भव्य आयोजन की तैयारी है।
छठ पूजा का चार दिनी अनुष्ठान
छठ महापर्व 25 अक्टूबर, शनिवार से शुरू होगा। पहले दिन नहाय-खाय की रस्म होगी। 26 अक्टूबर, रविवार को खरना व्रत रखा जाएगा। तीसरे दिन, 27 अक्टूबर, सोमवार को श्रद्धालु तालाबों में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे।
28 अक्टूबर, मंगलवार को उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ पर्व का समापन होगा। पूर्वोत्तर सांस्कृतिक संस्थान के साथ मेयर इन काउंसिल के सदस्य राजेंद्र राठौर ने विजय नगर छठ घाट का दौरा किया। उन्होंने घाटों पर सफाई, बिजली और अन्य सुविधाओं के निर्देश दिए।
150 घाटों पर भव्य आयोजन
पूर्वोत्तर सांस्कृतिक संस्थान के अध्यक्ष ठाकुर जगदीश सिंह और महासचिव केके झा ने बताया कि इंदौर में 150 से ज्यादा छठ घाट बनाए जा रहे हैं। इनमें स्कीम नंबर 54, 78, बाणगंगा, सुखलिया, श्याम नगर, तुलसी नगर, समर पार्क, अमृत पैलेस, पिपलियाहाना, कालानी नगर, निपानिया, सिरपुर, खजराना, देवास नाका, एरोड्रम रोड, राऊ और पीथमपुर शामिल हैं।
समितियां घाटों की सफाई, रंग-रोगन और सजावट में जुटी हैं। एक आयोजक ने कहा, “हर साल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। हमारा लक्ष्य बिना किसी असुविधा के भव्य आयोजन है।”
बिहार चुनाव का असर, फिर भी उत्साह बरकरार
इस साल 6 नवंबर को बिहार विधानसभा चुनाव हैं। इसके चलते कई लोग अपने गांव लौट गए हैं। फिर भी इंदौर में ढाई से तीन लाख लोग छठ मनाएंगे। स्थानीय समितियों ने जिम्मेदारियां बांट दी हैं। घाटों पर पानी, बिजली, सुरक्षा और साफ-सफाई की व्यवस्था की जा रही है। एक श्रद्धालु रमेश यादव ने कहा, “घर से दूर इंदौर में छठ की रौनक वही है। घाटों की सजावट देखकर मन खुश हो जाता है।”
सार्वजनिक अवकाश की मांग
पूर्वोत्तर सांस्कृतिक संस्थान ने 27 अक्टूबर को सांध्य अर्घ्य के लिए सार्वजनिक अवकाश की मांग की है। ठाकुर जगदीश सिंह ने कहा, “छठ अब सिर्फ बिहार या पूर्वांचल का पर्व नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान बन चुका है।” उन्होंने बताया कि कई राज्यों में छठ पर अवकाश है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल करने की बात कही है। यह पर्व की महत्ता को दर्शाता है।
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भव्य घाटों की जरूरत
संस्थान ने जिला प्रशासन और नगर निगम से मांग की है कि पिपलियाहाना, निपानिया, सिरपुर, खजराना, टिगरिया बादशाह और पिपलियापाला तालाबों पर स्थायी और भव्य छठ घाट बनाए जाएं। इससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी।
केके झा ने कहा, “श्रद्धालुओं की संख्या हर साल बढ़ रही है। स्थायी घाटों से आयोजन और भव्य होगा।” नगर निगम ने सफाई और सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कर्मचारी तैनात किए हैं।
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बता दें कि, छठ पूजा सूर्य और प्रकृति की उपासना का पर्व है। यह व्रत कठिन माना जाता है। महिलाएं और पुरुष 36 घंटे बिना अन्न-जल के व्रत रखते हैं। तालाबों में अर्घ्य देने की परंपरा इसकी विशेषता है। इंदौर में बसे पूर्वांचलवासियों के लिए यह पर्व घर जैसा अहसास देता है। एक महिला श्रद्धालु ने कहा, “छठ में सूर्यदेव को अर्घ्य देने से मन को शांति मिलती है।”