Diwali 2025 : उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के रूप चतुर्दशी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार हुआ। पुजारी परिवार की महिलाओं ने गर्म जल से स्नान कराया। सुगंधित उबटन लगाया। मंदिर दीपों से जगमगा उठा। भक्तों में उत्साह छा गया।
सुबह भस्म आरती में भगवान को मां लक्ष्मी के स्वरूप में सजाया गया। भांग, चंदन और आभूषण पहनाए गए। केसर-चंदन का उबटन लगाकर गर्म जल से स्नान कराया। नए वस्त्र और सोने-चांदी के गहनों से राजसी श्रृंगार हुआ। अन्नकूट भोग लगाया गया। फुलझड़ी से आरती कर दीवाली उत्सव मनाया गया। मंदिर परिसर भक्ति में डूबा रहा।
रूप चतुर्दशी पर पुजारी परिवार की महिलाओं को विशेष मौका मिला। साल में एक बार वे श्रृंगार में शामिल होती हैं। सुगंधित द्रव्यों से उबटन तैयार किया। कर्पूर आरती भी महिलाओं ने की। यह दृश्य भक्तों के लिए आनंदमयी था।
पुजारी महेश ने बताया कि महाकाल को पहले अन्नकूट भोग लगता है। धान, खाजा, शक्करपारे, मूली और बैंगन की सब्जी अर्पित की गई। यह परंपरा उज्जैन में खास है। आमतौर पर गोवर्धन पूजा पर अन्नकूट लगता है।
कार्तिक मास की सवारियां 27 अक्टूबर से शुरू होंगी। भगवान रजत पालकी में शिप्रा तट जाएंगे। सवारी 17 नवंबर तक चलेगी। 3 नवंबर को हरिहर मिलन सवारी होगी। यह उत्सव भक्तों को बांधे रखेगा।