Bhopal News : भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने वन भूमि पर अतिक्रमण हटाने के बाद कोर्ट में चल रहे मामलों को वापस लेने का फैसला किया है। वन विभाग ने वन बल प्रमुख को निर्देश जारी कर कहा कि जिला स्तर की समितियां ऐसे केसों की समीक्षा करेंगी। लेकिन गंभीर वन अपराधों से जुड़े मामले वापस नहीं होंगे। उधर, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अतिक्रमण मुक्त भूमि पर समृद्ध वनों का विकास करने के आदेश दिए हैं। यह कदम आदिवासी समुदायों को राहत देगा।
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जिला समितियां लेंगी फैसला
वन विभाग के निर्देशों के मुताबिक, जिला स्तर पर गठित समितियां अतिक्रमण मुक्त वन भूमि से जुड़े कोर्ट केसों को वापस लेने का निर्णय लेंगी। इन समितियों की अध्यक्षता कलेक्टर करेंगे। सदस्य होंगे डीएफओ और जिला अभियोजन अधिकारी। वे न्यायालयीन मामलों की लगातार समीक्षा करेंगे। परीक्षण के बाद ही केस वापसी का फैसला होगा। यह प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से चलेगी।
पुराने आदेशों का पालन
वन अधिकार अधिनियम 2006 लागू होने पर 13 दिसंबर 2005 तक के आदिवासियों के साधारण अतिक्रमण मामलों को 6 अगस्त 2006 को निरस्त करने के आदेश दिए गए थे। अब पिछले दस वर्षों में दर्ज अपराधों की सूची तैयार हुई।
इसमें 3470 मामले वन विभाग के पास हैं। कोर्ट में 4443 केस विचाराधीन हैं। इनमें वन कटाई, अतिक्रमण, अवैध उत्खनन और वन्यजीव अपराध शामिल हैं। चालान पेश हो चुके मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
गंभीर अपराधों पर सख्ती बरकरार
सभी केस वापस नहीं होंगे। वाहन जब्ती, राजसात, अवैध आरा मशीन चलाना, संगठित वृक्ष कटाई, अवैध उत्खनन, शिकार, वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाले केस कोर्ट में बने रहेंगे।
वन्यजीव आवास को क्षति, संगठित अवैध गतिविधियां, हथियारों से हिंसक अतिक्रमण जैसे मामलों को भी वापस नहीं लिया जाएगा। वन विभाग ने स्पष्ट किया कि साधारण अतिक्रमण ही लक्ष्य हैं।
सीएम का पर्यावरण पर जोर
मुख्यमंत्री ने वन अधिकारियों को निर्देश दिए कि अतिक्रमण मुक्त भूमि पर नए वन लगाए जाएं। इन क्षेत्रों को हरा-भरा बनाया जाए। इससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। आदिवासी परिवारों को वन अधिकार मिलेंगे। विभाग ने कहा कि यह कदम वन संरक्षण और सामाजिक न्याय का संतुलन बनाएगा।