MP News : मध्य प्रदेश। मंडला नगर परिषद निवास में हुए गबन ने प्रशासन को हिलाकर रख दिया। प्रभारी सीएमओ राजेश मार्को और दैनिक वेतनभोगी लेखापाल शिव कुमार झारिया ने 3 करोड़ 80 लाख रुपये की एफडी से उत्पन्न 15 लाख 50 हजार 892 रुपये के ब्याज को परिषद के खाते में जमा करने के बजाय निजी लाभ के लिए हड़प लिया। ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि सहायक ग्रेड-3 दीपक रजक और शिवांशी इंडिया निधि लिमिटेड, बिंझिया मंडला के संचालक ने इस गबन में सहयोग किया।
ईओडब्ल्यू के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह एक सुनियोजित साजिश थी। बैंक रिकॉर्ड में हेरफेर कर ब्याज को निजी खातों में डायवर्ट किया गया।” जांच में दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा और लेन-देन की ट्रेल मिली।
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राजेश मार्को पर मुख्य जिम्मेदारी है क्योंकि सीएमओ के रूप में वित्तीय निर्णय उनके नियंत्रण में थे। शिव कुमार ने लेखा रजिस्टर में हेरफेर किया, जबकि दीपक रजक ने सहायता प्रदान की। शिवांशी इंडिया निधि ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
1 करोड़ की FD 44 हजार का ब्याज गायब
नगर परिषद भुआ बिछिया में भी गबन का मामला उजागर हुआ। दुकान नीलामी से प्राप्त 1 करोड़ रुपये की एफडी से उत्पन्न 44 हजार 23 रुपये का ब्याज परिषद के खाते में जमा नहीं हुआ।
ईओडब्ल्यू ने इसे भी सरकारी धन का दुरुपयोग माना। जांच में स्थानीय लेखाकार और संभवतः बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “यह पैसा विकास के लिए था। गबन से सड़क और पानी की सुविधाएं प्रभावित हुईं।”
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ईओडब्ल्यू की त्वरित कार्रवाई
ईओडब्ल्यू जबलपुर ने दोनों मामलों में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की। मंडला में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 409 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत केस दर्ज हुआ।
भुआ बिछिया में भी समान धाराएं लगाई गईं। ईओडब्ल्यू ने बैंक स्टेटमेंट, एफडी रिकॉर्ड और गवाहों से पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारी ने कहा, “दोषियों की संपत्ति जब्त होगी। कठोर सजा सुनिश्चित करेंगे।” मंडला कलेक्टर ने जांच में पूर्ण सहयोग का वादा किया।
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विपक्ष ने सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, जबकि सत्ताधारी ने ईओडब्ल्यू की त्वरित कार्रवाई का हवाला दिया। सामाजिक कार्यकर्ता रमेश ठाकुर ने कहा, यह जनता का पैसा है। दोषी बड़े अधिकारी हों या छोटे, सजा जरूरी।