Latest

Ratapani Tiger Reserve : टाइगर लवर्स के लिए खुशखबरी, 10 अक्टूबर को खुलेंगे रातापानी रिजर्व के गेट

Ratapani Tiger Reserve

Ratapani Tiger Reserve : रायसेन। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित रातापानी टाइगर रिजर्व, जो भारत का 57वां और राज्य का 8वां टाइगर रिजर्व है, प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव उत्साही लोगों के लिए एक नया स्वर्ग साबित होने वाला है। यहां 90 से अधिक बाघों का विशाल कुनबा निवास करता है, लेकिन जंगल सफारी की शुरुआत 1 अक्टूबर की बजाय 10 अक्टूबर तक स्थगित कर दी गई है।

अधीक्षक सुनील भारद्वाज ने कहा, “पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया गया। सड़कों की मरम्मत तेजी से चल रही है।” यह रिजर्व विंध्य पर्वतमाला की प्राकृतिक सुंदरता, सागौन के घने जंगलों और समृद्ध इतिहास का संगम है, जहां एडवेंचर और विरासत का अनोखा मिश्रण मिलता है।

बारिश ने रोकी सफारी

रातापानी टाइगर रिजर्व के गेट 1 अक्टूबर से खुलने की उम्मीद थी, लेकिन भारी वर्षा ने सड़कों को नुकसान पहुंचा दिया। अधीक्षक सुनील भारद्वाज ने स्पष्ट किया, “जलभराव और सड़कों की खराब स्थिति से पर्यटकों को खतरा हो सकता था। इसलिए सफारी 10 अक्टूबर के आसपास शुरू होगी।” वन विभाग की टीम सड़कों की मरम्मत में जुटी है, ताकि पर्यटक सुरक्षित सफारी का आनंद ले सकें। यह निर्णय पर्यावरण और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लिया गया, जो रिजर्व की प्रबंधन क्षमता को दर्शाता है।

90 बाघों का साम्राज्य

रातापानी टाइगर रिजर्व 1271 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जिसमें 763 वर्ग किलोमीटर कोर क्षेत्र और 507 वर्ग किलोमीटर बफर जोन शामिल है। यह विंध्याचल पर्वतमाला की पहाड़ियों, पठारों, घाटियों और मैदानों से घिरा है, जहां सागौन के घने जंगल प्रमुख हैं। यहां 90 से अधिक बाघ निवास करते हैं, जो इसे टाइगर लवर्स के लिए स्वर्ग बनाते हैं।

बाघों के अलावा तेंदुए, सुस्त भालू, सांभर हिरण, चीतल, नीलगाय, जंगली सुअर और धोले जैसे जानवर आसानी से दिख जाते हैं। पक्षियों की 150 से अधिक प्रजातियां, जैसे पैराडाइज फ्लाईकैचर (मध्य प्रदेश का राज्य पक्षी), कोपर्स्मिथ बर्बेट, ब्लैक ड्रोंगो और बंगाल वल्चर, रिजर्व को जीवंत बनाती हैं।

बारना जलाशय और रातापानी डैम जैसे जल स्रोत प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करते हैं। सर्दियों में सारस क्रेन, पेंटेड स्टॉर्क और ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क यहां दिखते हैं। रिजर्व सूखे और नम पर्णपाती वनों से भरा है, जहां टीक (सागौन) 55% क्षेत्र कवर करता है।

रानी दुर्गावती का महल

रातापानी सिर्फ वन्यजीवों का घर नहीं, बल्कि इतिहास का खजाना भी है। कोर क्षेत्र में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भिंभेटका रॉक शेल्टर्स हैं, जहां 30,000 वर्ष पुरानी पाषाण युग की गुफा चित्रकारी है। रानी दुर्गावती का प्राचीन महल और द्वितीय विश्व युद्ध के जर्मन कैदी शिविर (POW कैंप) जैसे स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। गिन्नौरगढ़ किला, केरी महादेव और झोलियापुर डैम भी रिजर्व के भीतर हैं। यह विविधता एडवेंचर और इतिहास प्रेमियों को लुभाती है।

भोपाल से मात्र 50-60 किमी

रातापानी रायसेन, सीहोर और भोपाल जिलों की सीमाओं पर फैला है। भोपाल हवाई अड्डे से 50-60 किमी दूर, यह शहरवासियों के लिए आदर्श है। दिल्ली-मुंबई हाईवे से जुड़ा होने से पहुंच आसान है। रिजर्व 1976 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित हुआ, और 2024 में टाइगर रिजर्व बना। NTCA की मंजूरी से संरक्षण मजबूत हुआ।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *