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Supreme Court On Crackers : दिवाली से पहले सुप्रीम कोर्ट ने किया धमाका, पटाखे बनाने की दी सशर्त इजाजत

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Supreme Court On Crackers : नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में दिवाली 2025 की तैयारियों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सभी प्रकार के पटाखों – पारंपरिक, ग्रीन या अन्य की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। हालांकि, शुक्रवार (26 सितंबर) को पटाखा निर्माताओं को ग्रीन पटाखे बनाने की सीमित अनुमति दी गई, लेकिन इन्हें भी दिल्ली-एनसीआर में बेचने की इजाजत नहीं है।

कोर्ट ने सख्त शर्त रखी कि केवल NEERI (नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) और PESO (पीट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन) जैसी अधिकृत एजेंसियों से प्रमाणित निर्माता ही ग्रीन पटाखे बना सकेंगे। निर्माताओं को लिखित वचन देना होगा कि वे दिल्ली-एनसीआर में कोई पटाखा नहीं बेचेंगे। अगली सुनवाई में कोर्ट बिक्री पर अंतिम फैसला लेगा।

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पूर्ण प्रतिबंध जरूरी, लेकिन राष्ट्रीय नीति की मांग

मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, “दिल्ली-एनसीआर में पटाखों का उपयोग प्रदूषण को घातक स्तर पर ले जाता है। पूर्ण प्रतिबंध ही समाधान है।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्तर पर पटाखा प्रतिबंध लगाना संभव नहीं, क्योंकि केंद्र सरकार ने कोई पैन-इंडिया नीति प्रस्तावित नहीं की।

CJI गवई ने तंज कसा, “दिल्ली ‘एलीट’ शहर है, लेकिन अन्य शहरों के नागरिकों को साफ हवा का हक क्यों नहीं?” कोर्ट ने NCR राज्यों (हरियाणा, यूपी, राजस्थान) को भी निर्देश दिए कि वे दिल्ली की तरह सख्ती बरतें। पटाखा व्यापारियों की याचिका पर नोटिस जारी कर अगली सुनवाई तय की।

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ग्रीन पटाखों पर सशर्त अनुमति

शुक्रवार को कोर्ट ने ग्रीन पटाखा (कम प्रदूषण वाले) बनाने की अनुमति दी, लेकिन बिक्री पर पूर्ण रोक। शर्तें:

  • NEERI और PESO से सर्टिफिकेट अनिवार्य।
  • निर्माता लिखित में वादा करेंगे कि दिल्ली-एनसीआर में बिक्री नहीं करेंगे।
  • केवल प्रमाणित इकाइयों को अनुमति।

कोर्ट ने कहा, “ग्रीन पटाखे भी प्रदूषण बढ़ाते हैं। बैन के दौरान स्टॉक बिक्री के लिए नहीं रखा जा सकता।” व्यापारियों ने आजीविका प्रभावित होने का रोना रोया, लेकिन कोर्ट ने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी।

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दिल्ली-एनसीआर में दिवाली पर पटाखों से प्रदूषण चरम पर पहुंच जाता है। नवंबर 2024 में AQI 494 तक पहुंचा, जब स्मॉग ने सांस लेना मुश्किल कर दिया। कोर्ट ने कहा, “पिछले वर्षों में GRAP-IV लागू हुआ, लेकिन पटाखे बैन फ्लाउट हुए। अब पूर्ण प्रतिबंध।” CAQM (कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट) ने भी सख्ती की सिफारिश की।

CJI गवई ने कहा, “प्रदूषण दिल्ली तक सीमित नहीं। अमृतसर, कानपुर में भी बदतर है। राष्ट्रीय नीति बने।” कोर्ट ने केंद्र को नोटिस दिया। व्यापारियों ने कहा, “लाखों परिवार प्रभावित।” लेकिन कोर्ट ने स्वास्थ्य को ऊपर रखा।

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