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Navratri Garba Festival 2025 : भोपाल के बाद अब विदिशा में भी गरबा उत्सव में सनातनी ही अलाउड, आधार कार्ड के साथ तिलक अनिवार्य

Only Sanatanis Are Allowed in Vidisha Navratri Garba Festival 2025

Only Sanatanis Are Allowed in Vidisha Navratri Garba Festival 2025 : विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में शारदीय नवरात्रि 2025 की धूम के बीच गरबा आयोजनों को लेकर एक नया नियम लागू कर दिया गया है, जिसने स्थानीय स्तर पर चर्चा छेड़ दी है। आयोजक समितियों ने स्पष्ट किया है कि गरबा पंडालों में केवल सनातन धर्म के लोगों को ही प्रवेश दिया जाएगा। इसके लिए आधार कार्ड दिखाना अनिवार्य होगा और प्रवेश द्वार पर तिलक लगाकर ही लोगों को अंदर आने की अनुमति मिलेगी।

आयोजकों का कहना है कि यह कदम गरबा के धार्मिक स्वरूप को बनाए रखने और ‘लव जिहाद’ जैसी कथित घटनाओं को रोकने के लिए उठाया गया है। कार्यक्रम में अश्लील या फिल्मी गीतों पर नृत्य पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा और केवल मां भगवती के भजन व पारंपरिक गीतों पर ही गरबा होगा।

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सुरक्षा के लिए निजी गार्ड तैनात रहेंगे। यह नियम ब्राह्मण समाज, एकलव्य संगठन और अन्य धार्मिक समूहों द्वारा आयोजित गरबा पर लागू होगा, जो कई वर्षों से विदिशा में परंपरा का हिस्सा हैं।

गरबा पूजा है न कि मनोरंजन

विदिशा के गरबा आयोजकों ने कहा, “गरबा मां दुर्गा की आराधना का पवित्र माध्यम है, न कि सांस्कृतिक मनोरंजन। इसलिए, इसमें केवल सनातन धर्मावलंबियों को शामिल किया जाएगा।” आधार कार्ड चेकिंग से पहचान सुनिश्चित होगी और तिलक लगाने से धार्मिक भावना बनी रहेगी। आयोजकों ने अपील की कि लोग गरबा की गरिमा बनाए रखें। यह नियम नवरात्रि के पहले दिन (22 सितंबर 2025) से लागू हो गया है।

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सुरक्षा के इंतजाम

कार्यक्रम स्थलों पर निजी सुरक्षा कर्मी तैनात रहेंगे, जो प्रवेश द्वार पर सतर्कता बरतेंगे। आयोजकों ने कहा, “कोई भी संदिग्ध व्यक्ति अंदर नहीं घुस सकेगा।” विदिशा में गरबा का इतिहास समृद्ध है – ब्राह्मण समाज और एकलव्य संगठन जैसे समूह सालों से आयोजन करते आ रहे हैं। इस बार के नियमों से आयोजन अधिक व्यवस्थित होंगे, लेकिन सामाजिक सद्भाव पर असर पड़ सकता है।

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मध्य प्रदेश में गरबा नियमों का ट्रेंड

यह नियम मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में भी देखने को मिल रहा है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन जैसे शहरों में हिंदू संगठनों ने तिलक, कलावा और आधार कार्ड चेकिंग की मांग की है। VHP के अनुसार, “गरबा पूजा है, न कि नृत्य।” विपक्ष ने इसे ‘भेदभाव’ लेकिन आयोजक इसे ‘धार्मिक पवित्रता’ बताया है।

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