Two Youths Missing in Betul : बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में लगातार बारिश ने नदियों को प्रलयंकारी बना दिया है। तीन दिनों में दो अलग-अलग हादसों ने दो युवकों की जिंदगी पर सवालिया निशान लगा दिया। एसडीआरएफ, पुलिस और रेस्क्यू दल की टीमें नॉन-स्टॉप सर्च कर रही हैं, लेकिन तेज बहाव और अंधेरे ने सबको लाचार कर दिया। जानकारी के मुताबिक, बैतूल में तीन दिनों में दो युवक लापता हुए है जिनकी तलाश अजा भी जारी है।
महाराष्ट्र के मोरछी गांव का रहने वाला 17 साल का कुणाल किशोर बागड़े अपने दो दोस्तों के साथ बाइक पर सालबर्डी घूमने पहुंचा। नर्मदा की सहायक मांडू नदी के किनारे नहाने का मन हुआ, लेकिन पैर फिसल गया और तेज बहाव ने उसे लील लिया।
कुणाल कॉलेज का छात्र था, परिवार का इकलौता बेटा। पिता पेंटिंग का काम करते हैं, मां मजदूरी से घर चलाती हैं, और एक बहन है। हादसे की खबर सुनते ही परिवार टूट गया – मां रोते-रोते बेहोश हो गईं।
एसडीआरएफ की टीम और आठनेर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। अमरावती से भी रेस्क्यू दल बुलाया गया, ड्रोन और नावों से सर्च चल रही है। लेकिन तीन दिन बाद भी कुणाल का कोई सुराग नहीं। दोस्तों ने बताया, “वो मजाक कर रहा था, अचानक बह गया। हम चिल्लाए, लेकिन पानी ने सब कुछ बहा लिया।” यह घटना बैतूल के आठनेर क्षेत्र की है, जहां बारिश ने नदियों को खतरनाक बना दिया। परिजन मंदिरों में प्रार्थना कर रहे हैं, लेकिन उम्मीद की डोर कमजोर पड़ रही है।
दूसरा हादसा: भैंसाई नदी की पुलिया पर बहा युवक
सोमवार देर शाम को दूसरा झटका लगा। बोरदेही थाना क्षेत्र के मुआरिया गांव के पास भैंसाई नदी की पुलिया पार कर रहे अरुण उइके (बेहड़ी गांव) और उनका साथी मंदो यादव बह गए। पानी का तेज बहाव और पुलिया का टूटा-फूटा होना – ये दोनों मिलकर मौत का जाल बुन चुके थे। मंदो ने हिम्मत दिखाई और तैरकर बाहर निकल आया, फिर पुलिस को सूचना दी। लेकिन अरुण लापता है। थाना प्रभारी राधेश्याम वट्टी ने बताया, “नदी में भयानक बहाव था, अंधेरा होने से सर्च ऑपरेशन रुक गया। फसलें और पेड़-पौधे ने रास्ता मुश्किल कर दिया। मंगलवार सुबह से फिर शुरू किया।”
अरुण गांव का मेहनती युवक था, परिवार की उम्मीद। मंदो ने कहा, “हम काम से लौट रहे थे, पुलिया पर पानी ज्यादा था। अचानक बहाव ने हमें घेर लिया। मैंने हाथ बढ़ाया, लेकिन वो दूर चला गया।” एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की टीमें डूबकी लगा रही हैं, लेकिन तेज धारा ने सबको पीछे धकेल दिया। गांव वाले डर से घरों में कैद हैं, बच्चे नदियों के पास जाने से कतरा रहे हैं।
बैतूल में बाढ़ जैसे हालात
बैतूल जिले में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने नदियों को उग्र बना दिया है। मांडू और भैंसाई जैसी नदियां उफान पर हैं, पुलियां डूब रही हैं, और सड़कें कट गई हैं। जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में लोग अभी भी जोखिम ले रहे हैं। इन दो हादसों से न सिर्फ परिवार टूटे, बल्कि पूरे जिले में सन्नाटा पसर गया। परिजन रेस्क्यू टीमों पर भरोसा कर रहे हैं, लेकिन देरी से गुस्सा भी फूट रहा। एक बुजुर्ग ने कहा, “हर साल यही होता है, लेकिन सुधार कब होगा?”
पुलिस की अपील
पुलिस अधिकारियों ने दोनों घटनाओं की पुष्टि की है। एसपी और कलेक्टर ने साफ कहा – बाढ़ जैसे हालात हैं, नदियों, नालों और पुलियों के पास न जाएं। बच्चे और युवा खासतौर पर सावधान रहें। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, ड्रोन और हेलीकॉप्टर की मदद ली जा रही है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दी सर्च जरूरी, क्योंकि तेज बहाव में शव दूर बह सकते हैं। बैतूल प्रशासन ने गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया है, लेकिन अब जनता का सहयोग चाहिए।