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CM Tirtha Darshan Yojana Controversy : राजगढ़ से असम कामाख्यादेवी मंदिर यात्रा पर सियासत गर्म, विधायक की पत्नियों के नाम पर उठे सवाल

CM Tirtha Darshan Yojana Controversy

Mukhyamantri Tirtha Darshan Yojana controversy Rajgarh News : राजगढ़। मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना जो लाखों जरूरतमंदों के लिए वरदान साबित हो रही है आजकल राजगढ़ जिले में विवादों के केंद्र में है। सोमवार को राजगढ़ से असम के कामाख्या देवी मंदिर के लिए विशेष ट्रेन रवाना होनी है, लेकिन इस यात्रा की चयन सूची ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। कांग्रेस ने भाजपा विधायक हजारीलाल दांगी की दोनों पत्नियों और वरिष्ठ पदाधिकारी इंद्रा मूंडड़ा के नाम शामिल होने पर तीखे सवाल उठाए हैं। क्या ये योजना गरीबों की है या प्रभावशाली लोगों की जेब भरने का जरिया?

ये है पूरा मामला

ये विवाद तब भड़का जब कांग्रेस के जिलाध्यक्ष और पूर्व ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह ने योजना की चयन प्रक्रिया पर उंगली उठाई। उनका कहना है कि गरीबों के लिए शुरू की गई इस योजना में भाजपा नेताओं और उनके परिजनों के नाम जुड़ना पारदर्शिता पर सीधा सवाल है। प्रियव्रत सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “राजगढ़ जिले से चयनित सूची में गरीब जनता की जगह बीजेपी नेताओं और उनकी पत्नियों के नाम जोड़े गए हैं।

प्रशासन की निगाह में शायद यही लोग सबसे गरीब हैं।” ये शब्द न सिर्फ सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, बल्कि पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गए। लोगों का मानना है कि ऐसी योजनाओं में भेदभाव अस्वीकार्य है, खासकर जब देश आर्थिक असमानता से जूझ रहा हो।

प्रियव्रत सिंह ने शनिवार को माचलपुर में आयोजित कांग्रेस की बैठक के दौरान एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने योजना के नियमों पर सवाल खड़े किए। वीडियो में उन्होंने कहा, “मेरे पास सूचना आई कि सूची में खिलचीपुर विधायक हजारीलाल दांगी की पत्नी ज्योत्सना दांगी और सरदारबाई दांगी का नाम शामिल है। ज्योत्सना जी का पता काशीखेड़ी और सरदारबाई जी का जीरापुर है। योजना के नियमों के अनुसार, आयकरदाता व्यक्ति को यात्रा का लाभ नहीं मिलना चाहिए।

ज्योत्सना जी पूर्व शासकीय सेवक रही हैं, इसलिए उनकी पेंशन पर सवाल उठता है। अगर पेंशन 12 लाख से कम है, तो शायद वे आयकर श्रेणी से बाहर हों, लेकिन भाजपा की वरिष्ठ पदाधिकारी इंद्रा मूंडड़ा का नाम सूची में होना तो हैरानी की हद है।” ये बातें सुनकर स्थानीय लोग भी सोच में पड़ गए।

प्रियव्रत सिंह ने ट्वीट कर कलेक्टर के ऊपर आरोप लगाए।
प्रियव्रत सिंह ने ट्वीट कर कलेक्टर के ऊपर आरोप लगाए।

विवाद का केंद्र विधायक हजारीलाल दांगी की पत्नियों का नाम है। प्रियव्रत सिंह ने तंज कसते हुए कहा, “विधायक स्वयं आयकरदाता हैं, ऐसे में उनकी पत्नी का नाम योजना में आना सही है या नहीं? क्या विधायक जी का जमीर गवाह देता है कि गरीबों की योजना में अपनी पत्नी को शामिल कराएंगे?” ये सवाल न सिर्फ राजनीतिक हैं, बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़े हैं।

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कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि उनका इरादा किसी की व्यक्तिगत आलोचना नहीं, बल्कि योजनाओं के सही उपयोग की मांग है। उन्होंने कहा, “यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है, तो ठीक, लेकिन अगर गड़बड़ी हुई है, तो जिम्मेदारों को जवाब देना होगा। ये राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि गरीबों के हक की लड़ाई है।

बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपी का किया खंडन

भाजपा की ओर से विधायक हजारीलाल दांगी ने इन आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा, “हमारे यहां से कोई भी व्यक्ति तीर्थ दर्शन यात्रा पर नहीं जा रहा है। ये आरोप पूरी तरह गलत हैं। जारी लिस्ट के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है, और मैंने कोई आवेदन भी नहीं दिया। वर्तमान में हमारे घर पर पितृ भागवत चल रही है, जहां 4-5 पंडित भागवत का पाठ कर रहे हैं।

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पाठ पूरे होने के बाद मेरी पत्नी मेरे साथ पितरों को छोड़ने गयाजी जाएंगी। सुबह 9:30 बजे से हम पूजन में शामिल होते हैं। तीर्थ दर्शन योजना की यात्रा आज हो रही है, लेकिन हमारा कार्यक्रम अलग है। मैं भी परिवार के साथ गयाजी जाऊंगा, लेकिन ये योजना से जुड़ा नहीं।” विधायक का ये बयान विवाद को शांत करने की कोशिश लगता है, लेकिन कांग्रेस ने इसे और पुख्ता सबूत बताते हुए चुनौती दी है।

मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के हितग्राहियों की लिस्ट
मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के हितग्राहियों की लिस्ट
मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के हितग्राहियों की लिस्ट
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क्या बोले कलेक्टर वीरेंद्र दांगी

प्रशासन ने भी मामले को स्पष्ट करने की कोशिश की। यात्रा प्रभारी और राजगढ़ संयुक्त कलेक्टर वीरेंद्र दांगी ने बताया कि तीर्थ यात्रा के लिए लगभग 1700 से 1800 फॉर्म प्राप्त हुए थे। चयन प्रक्रिया में रैंडम पद्धति का उपयोग किया गया। सभी आवेदकों ने समय पर फॉर्म जमा किए, साथ ही उम्र प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, समग्र आईडी और आय से संबंधित स्व-घोषणा पत्र संलग्न थे।

कलेक्टर ने कहा, “चयन पूरी तरह पारदर्शी था, और सभी दस्तावेजों की जांच के बाद ही नाम फाइनल हुए। कोई भेदभाव नहीं किया गया।” ये सफाई देने के बावजूद, विपक्ष का शक बरकरार है, और लोग चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

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