Protest Against Land Pooling Act in MP : भोपाल। मध्य प्रदेश के उज्जैन में 2028 सिंहस्थ के नाम पर 2378 हेक्टेयर जमीन का स्थायी अधिग्रहण हो रहा है, जिसमें 17 गांवों के 1806 किसानों की उपजाऊ भूमि लैंड पूलिंग स्कीम के तहत 50% तक छीनी जा रही है। RSS का अनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ (BKS) इसे किसानों का विस्थापन मानता है और आज पूरे MP में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर रहा है।
कलेक्टरों को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं और कल उजजैन में 500 से ज्यादा ट्रैक्टरों की रैली निकलेगी। BKS के राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्रा खुद उज्जैन में उतरेंगे, जहां वे लैंड पूलिंग एक्ट के खिलाफ आगे के आंदोलनों की घोषणा करेंगे।
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ये आंदोलन कोई नया नहीं। मार्च 2025 से ही उज्जैन के किसान लैंड पूलिंग का विरोध कर रहे हैं। BKS का कहना है कि सिंहस्थ एक बार 12 साल में होता है, तो स्थायी कंक्रीट जंगल क्यों बनाना? वे परंपरागत तरीके से अस्थायी मेला क्षेत्र बनाने को तैयार हैं, लेकिन पुश्तैनी जमीन पर स्थायी कब्जा बर्दाश्त नहीं। हाल ही में अगस्त 2025 में किसानों ने चक्रतीर्थ श्मशान घाट पर पानी में खड़े होकर प्रदर्शन किया और आगर रोड पर चक्काजाम कर दिया।
BKS ने भोपाल में प्रदेश बैठक बुलाई, जहां मोहिनी मोहन मिश्रा ने साफ कहा, “सिंहस्थ और लैंड पूलिंग के नाम पर किसानों को बेघर किया जा रहा है। बिना चर्चा के गाइडलाइंस लागू करना सरकार की नीयत पर सवाल है।” उन्होंने CM को चिट्ठी लिखी, जिसमें सुझाव दिए – नदी किनारे मेला बनाओ, स्थायी निर्माण मत करो। लेकिन सरकार ने 3300 हेक्टेयर में ‘स्पिरिचुअल सिटी’ बनाने का प्लान जारी रखा, जो हरिद्वार जैसी धार्मिक नगरी बनेगी।
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आज का प्रदर्शन MP के हर जिले में फैलेगा। BKS कार्यकर्ता कलेक्टर कार्यालयों पर धरना देंगे और PM मोदी को 15 मांगों का ज्ञापन सौंपेंगे। ये मांगें सिर्फ सिंहस्थ तक सीमित नहीं, बल्कि किसानों के व्यापक हितों से जुड़ी हैं। कल उज्जैन में ट्रैक्टर रैली के जरिए मोहिनी मोहन मिश्रा आंदोलन को तेज करेंगे।
किसान संघर्ष समिति ने भी चेतावनी दी है कि अगर लैंड पूलिंग नहीं रुकी, तो बड़ा आंदोलन होगा। उज्जैन विकास प्राधिकरण का कहना है कि ये विकास के लिए जरूरी है, लेकिन किसान चिल्ला रहे हैं- “हमारी जमीन, हमारा हक!” एक किसान ने कहा, “50% जमीन दे दी तो बाकी क्या बचेगा? हमारे बच्चे भूखे मरेंगे।”
BKS की 15 मांगें न सिर्फ स्थानीय, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की हैं। ये किसानों की लंबी लड़ाई का हिस्सा हैं, जहां जीएसटी से लेकर MSP तक हर मुद्दा शामिल है। संगठन का दावा है कि ये मांगें किसानों को सशक्त बनाएंगी।
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1 खेती में लगने वाले बीज, खाद, दवाई और यंत्रों से जीएसटी पूरी तरह हटाया जाए।
2 फसलों की आयात-निर्यात नीति किसानों के हित में बनाई जाए। जब हमारी फसल तैयार हो तब बाहर से आयात न किया जाए।
3 खेती के सभी यंत्र, दवाइयां और बीज पर जीएसटी की दर बहुत कम रखी जाए।
4 जीएम (जीन बदलकर बनाए गए) बीजों को देश में किसी भी हाल में आने की अनुमति न दी जाए।
5 सरकार ने कपास पर जो आयात शुल्क हटाया है, उसे फिर से लगाया जाए।
6 जमीन का अधिग्रहण केवल राष्ट्रीय महत्व और विकास की योजनाओं के लिए ही हो। पूरे देश में इसके लिए एक समान कानून बने।
7 बैंकों की वजह से किसानों को योजनाओं का पूरा फायदा नहीं मिल पाता। हर जिले में एक अधिकारी नियुक्त किया जाए और किसानों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी हो।
8 कृषि लोन और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की प्रक्रिया आसान, ऑनलाइन और पारदर्शी की जाए। दस्तावेज देने के बाद भी परेशान करने वाले बैंक अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
9 जैसे मुद्रा लोन तुरंत मिलता है, वैसे ही किसानों को भी तुरंत कृषि लोन मिले।
10 खेती में लगने वाले डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए।
11 हर ग्राम पंचायत में वर्षा नापने की मशीन (वर्षा मापक यंत्र) लगाई जाए।
12 हर जिले में कृषि कॉलेज खोले जाएं और छोटी कक्षाओं से ही बच्चों को कृषि की पढ़ाई कराई जाए।
13 सभी फसलों की खरीदी पूरे साल समर्थन मूल्य (MSP) पर की जाए।
14 किसान सम्मान निधि की राशि महंगाई के अनुसार बढ़ाकर ₹10,000 प्रति हेक्टेयर की जाए।
15 जैविक खेती करने वाले किसानों को भी खाद की सब्सिडी जितना ही प्रोत्साहन दिया जाए। फसल बीमा योजना में सैटेलाइट से सर्वे सही नहीं है। इसे बदलकर फिर से खेत में जाकर जांच (नेत्रांकन) से नुकसान का आकलन किया जाए। किसानों को 5 लाख रुपए तक का कृषि ऋण (KCC) दिया जाए।