Why is Social Media Banned in Nepal : नेपाल सरकार ने 4 सितंबर को 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, जिनमें यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम, X और व्हाट्सएप शामिल हैं, को बैन करने का फैसला किया। यह निर्णय पंजीकरण न करने के कारण लिया गया, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सोशल मीडिया रेगुलेशन डायरेक्टिव्स 2080 (2023) के तहत अनिवार्य है। संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण (NTA) को इन अपंजीकृत प्लेटफॉर्म्स को तत्काल ब्लॉक करने का निर्देश दिया।
क्यों किया बैन
दरअसल, 17 अगस्त 2025 को नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट केस (080-8-0012) में आदेश दिया कि सभी देशी और विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नेपाल में संचालन से पहले पंजीकरण करना होगा। इसका उद्देश्य गलत सूचनाओं को नियंत्रित करना और कानूनी जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
7 दिन की समय सीमा
28 अगस्त 2025 को मंत्रालय ने सभी प्लेटफॉर्म्स को पंजीकरण के लिए 7 दिन का अल्टीमेटम दिया, जो 3 सितंबर 2025 की आधी रात को समाप्त हुआ। मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप), अल्फाबेट (यूट्यूब), X, रेडिट, और लिंक्डइन जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स ने पंजीकरण के लिए कोई आवेदन नहीं किया। संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग ने बताया कि नवंबर 2023 से इन कंपनियों को 5 बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
बैन किए गए 26 प्लेटफॉर्म्स
नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण (NTA) ने निम्नलिखित 26 प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक करने का आदेश दिया:
फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, मैसेंजर, थ्रेड्स, यूट्यूब, X (पूर्व में ट्विटर)
लिंक्डइन, रेडिट, स्नैपचैट, डिस्कॉर्ड, पिंटरेस्ट, सिग्नल, वीचैट, क्वोरा, टम्बलर, क्लबहाउस, रंबल, एमआई वीडियो, एमआई वाइके, लाइन, इमो, जालो, सोल, हैमरो पैट्रो
पंजीकृत प्लेटफॉर्म्स: टिकटॉक, वाइबर, वेटॉक, निंबज, और पोपो लाइव पहले ही पंजीकृत हैं। टेलीग्राम और ग्लोबल डायरी की पंजीकरण प्रक्रिया चल रही है।
बैन का तकनीकी कार्यान्वयन
NTA का निर्देश: मंत्रालय ने नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण को सभी इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISP) और दूरसंचार ऑपरेटरों को अपंजीकृत प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक करने का आदेश दिया।
प्रभावी तिथि: यह बैन 4 सितंबर 2025 की आधी रात से लागू हो गया। कुछ यूजर्स ने बताया कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ब्राउज़र से लॉगिन करने पर “साइट नॉट रीच्ड” या “कनेक्शन फेल” जैसे मैसेज दिख रहे हैं।
VPN का उपयोग: X पोस्ट और वेब रिपोर्ट्स के अनुसार, कई यूजर्स VPN और OpenDNS का उपयोग कर प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म्स तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इससे डेटा सिक्योरिटी और इंटरनेट लागत बढ़ने का खतरा है।
संचार पर प्रभाव: विश्व बैंक 2024 के आंकड़ों के अनुसार, नेपाल की 33.06% GDP व्यक्तिगत रेमिटेंस से आती है। 7 मिलियन से ज्यादा नेपाली विदेश में पढ़ाई या काम के लिए हैं, जो व्हाट्सएप और मैसेंजर जैसे प्लेटफॉर्म्स से परिवार से जुड़े रहते हैं। यह बैन उनकी संचार क्षमता को प्रभावित करेगा।
आर्थिक नुकसान: फेसबुक ने हाल ही में नेपाल में मॉनेटाइजेशन प्रोग्राम शुरू किया था, जिससे कंटेंट क्रिएटर्स को आय हो रही थी। इस बैन से डिजिटल अर्थव्यवस्था और कंटेंट क्रिएटर्स की कमाई प्रभावित होगी।
पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: फेडरेशन ऑफ नेपाली जर्नलिस्ट्स (FNJ) ने इस बैन की निंदा की, इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना के अधिकार पर हमला बताया। CPJ (कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स) ने भी इसे पत्रकारिता के लिए खतरनाक बताया।
सामाजिक प्रतिक्रिया: X पर एक यूजर ने लिखा, “विदेश में रहने वाले नेपाली अब परिवार से कैसे बात करेंगे?” यह बैन नेपाली डायस्पोरा और स्थानीय यूजर्स के बीच चिंता का विषय बन गया है।
सरकार का रुख
पंजीकरण की शर्तें: मंत्रालय के अनुसार, प्लेटफॉर्म्स को नेपाल में संपर्क व्यक्ति नियुक्त करना होगा, स्थानीय शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करना होगा, और कंटेंट मॉनिटरिंग के लिए सहमति देनी होगी। X पर कुछ यूजर्स ने इसे अत्यधिक हस्तक्षेप बताया।
पुनर्स्थापना की संभावना: मंत्रालय के प्रवक्ता गजेंद्र कुमार ठाकुर ने कहा कि पंजीकरण पूरा करने पर प्लेटफॉर्म्स को तुरंत बहाल किया जाएगा। मेटा ने 4 सितंबर को मंत्रालय को पंजीकरण प्रक्रिया के लिए दस्तावेजों की जानकारी मांगने वाला ईमेल भेजा, जिससे जल्द अनुपालन की उम्मीद है।
- टिकटॉक को नवंबर 2023 में बैन किया गया था, लेकिन अगस्त 2024 में पंजीकरण के बाद बहाल कर दिया गया। टेलीग्राम को जुलाई 2025 में ऑनलाइन फ्रॉड के कारण बैन किया गया था।
- भारत, इंडोनेशिया, और चीन जैसे देशों ने भी डेटा प्राइवेसी, टैक्सेशन, और कंटेंट रेगुलेशन के लिए सोशल मीडिया पर सख्त नियम लागू किए हैं। नेपाल का यह कदम डिजिटल संप्रभुता की दिशा में एक प्रयास है।
- एक्सेस नाउ के रमन जीत सिंह चिमा ने इस बैन को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया और पारदर्शी विधायी प्रक्रिया की मांग की।