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Excise Fake Invoice Scam : अंश त्रिवेदी की जमानत खारिज, ED ने ठहराया 194 फर्जी चालानों का मास्टरमाइंड

Excise Fake Invoice Scam

Excise Fake Invoice Scam : इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के चर्चित 71 करोड़ रुपये के आबकारी फर्जी चालान घोटाले में जिला अदालत ने शुक्रवार को मुख्य आरोपी व शराब ठेकेदार अंश त्रिवेदी की जमानत याचिका ठुकरा दी। विशेष न्यायाधीश (पीएमएल एक्ट) की अदालत में सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जमकर विरोध किया।

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अंश त्रिवेदी के वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल निर्दोष है। उन्होंने दावा किया कि राज्य को कोई राजस्व हानि नहीं हुई। साथ ही बताया कि अंश उदयपुर में डेंगू और पीठ दर्द के इलाज में हैं। इसलिए जमानत दी जाए।

ईडी के विशेष लोक अभियोजक चंदन ऐरन ने पलटवार किया। उन्होंने अंश को घोटाले का मास्टरमाइंड बताया। कहा कि इससे सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ। जमानत मिली तो साक्ष्य प्रभावित होंगे। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

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49 से 71 करोड़ तक बढ़ा घोटाला

शुरुआत में घोटाला 49 करोड़ का लग रहा था। लेकिन ईडी की जांच में यह 71 करोड़ तक पहुंच गया। एजेंसी ने 194 बैंक चालानों में फर्जीवाड़ा पकड़ा। इस मामले में शराब ठेकेदार अंश त्रिवेदी और राजू दशवंत गिरफ्तार हो चुके हैं। अदालत ने इन्हें 8 अक्टूबर तक ईडी हिरासत में भेजा था।

आठ साल पुराना कांड

घोटाले की जड़ें आठ साल पुरानी हैं। रावजी बाजार थाने में आबकारी विभाग ने 14 लोगों पर धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज की थी। कुछ अफसर निलंबित हुए, लेकिन जांच सुस्त रही। कई बाद में बहाल हो गए।

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अफसरों पर ईडी का निशाना

ईडी ने इंदौर के 18 ठिकानों पर हाल ही में छापे मारे। इनमें एमजी रोड समूह के अविनाश व विजय श्रीवास्तव, जीपीओ चौराहा के राकेश जायसवाल, तोपखाना के योगेंद्र जायसवाल, बायपास देवगुराड़िया के राहुल चौकसे, गवली पलासिया के सूर्यप्रकाश अरोरा, गोपाल कुशवाह, लवकुश व प्रदीप जायसवाल के नाम उभरे।

सूत्र बताते हैं कि ईडी अब तत्कालीन सहायक आयुक्त संजीव दुबे, डीएस सिसोदिया, सुखनंदन पाठक, कौशल्या सबवानी, धनराज सिंह परमार व अनमोल गुप्ता को समन भेज चुकी है। पूछताछ होगी।

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फर्जी चालान का तरीका

ईडी की जांच से पता चला कि ठेकेदारों ने कम राशि के चालान जमा किए। लेकिन “रुपये में शब्द” वाला हिस्सा खाली छोड़ दिया। बाद में अंकों व शब्दों में राशि बढ़ाकर जाली चालान बनाए। इन्हें आबकारी कार्यालयों में जमा कर एनओसी व लाइसेंस हासिल किए। इससे राज्य को भारी नुकसान हुआ। अंश व राजू को मुख्य साजिशकर्ता माना जा रहा है।

Q. इंदौर आबकारी घोटाले में अंश त्रिवेदी की जमानत क्यों खारिज हुई?
ईडी ने अंश को मास्टरमाइंड बताया। कहा कि जमानत पर साक्ष्य प्रभावित होंगे। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनकर याचिका ठुकरा दी।

Q. इंदौर फर्जी चालान घोटाला कितने करोड़ का है?
शुरुआत में 49 करोड़ माना गया था। ईडी जांच में यह 71 करोड़ तक पहुंच गया। 194 चालानों में फर्जीवाड़ा पकड़ा गया।

Q. आबकारी घोटाले में कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?
मुख्य आरोपी शराब ठेकेदार अंश त्रिवेदी और राजू दशवंत गिरफ्तार हैं। इन्हें ईडी हिरासत में भेजा गया।

Q. घोटाले का तरीका क्या था?
ठेकेदारों ने कम राशि के चालान जमा किए। शब्द वाला हिस्सा खाली छोड़ “रुपये में शब्द” बढ़ाकर जाली बनाए। इससे लाइसेंस व एनओसी हासिल की।

Q. ईडी अब किन अफसरों पर कार्रवाई करेगी?
तत्कालीन सहायक आयुक्त संजीव दुबे, डीएस सिसोदिया, सुखनंदन पाठक, कौशल्या सबवानी, धनराज सिंह परमार व अनमोल गुप्ता को समन भेजा गया। पूछताछ होगी।

Q. आबकारी घोटाला कब शुरू हुआ?
घोटाला आठ साल पहले रावजी बाजार थाने में दर्ज एफआईआर से शुरू हुआ। कुछ अफसर निलंबित हुए, लेकिन जांच धीमी रही।

Q. इंदौर छापों में कौन-कौन के नाम आए?
अविनाश व विजय श्रीवास्तव, राकेश जायसवाल, योगेंद्र जायसवाल, राहुल चौकसे, सूर्यप्रकाश अरोरा, गोपाल कुशवाह, लवकुश व प्रदीप जायसवाल।

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