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हरदा की ऐतिहासिक विरासत

Harda

मध्य प्रदेश का हरदा जिला नर्मदा नदी की घाटी में बसा है। ये अपनी जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और हरियाली के किए जाना जाता है। इतना ही नहीं हरदा जिले की पहचान घने सागौन के जंगलों, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और ऐतिहासिक स्थलों से जुड़ी है। 

जानकारी के लिए बता दें कि, 6 जुलाई 1998 को हरदा नर्मदापुरम जिले से अलग हुआ। इसके बाद से ही अस्तित्व में आए हरदा जिले का ऐतिहासिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। ये जिला समुद्र तल से 302 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और मध्य प्रदेश के दक्षिण-पश्चिमी भाग में नर्मदापुरम संभाग के अंतर्गत आता है। यह क्षेत्र कोरकू और गोंड आदिवासियों से आबाद है, जो इसकी कुल जनसंख्या का दो-तिहाई हिस्सा हैं।

आइए अब जानते हैं इसके ऐतिहासिक स्थल और धार्मिक पर्यटन के बारे में 

 

ऐतिहासिक स्थल 

हरदा में कई ऐतिहासिक जगह हैं। जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इनमें हंडिया का प्राचीन रिद्धनाथ मंदिर, जोगा का किला, मकडाई मंदिर और चरुआ का चक्रव्यूह मंदिर प्रमुख हैं। साथ ही रेणुका जी मंदिर, सिद्धनाथ मंदिर, खेत वाली माता मंदिर और नेमावाड़ का सूर्य कुंड यहां के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हैं।

 

ट्रैकिंग और प्राकृतिक पर्यटन

जिले की हरियाली, बारिश और जलवायु इसे ट्रैकिंग प्रेमियों के लिए भी एक यादगार सफर बनाती है। मकरई ट्रैकिंग के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। जहां पर्यटकों के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां एक साल में औसतन 916 मिलीमीटर बारिश होती है। वहीं गर्मियों में तापमान 48°C और सर्दियों में 6°C तक जाता है।

 

जनजातीय संस्कृति की झलक

आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में जनजातीय जीवन की झलक साफ देखी जा सकती है। सांस्कृतिक और सामाजिक अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं के लिए यह जिला एक उपयोगी गंतव्य माना जाता है।

 

मुगल, मराठा और अंग्रेजी शासन

हरदा का इतिहास काफी पुराना है। मुगल काल में हंडिया और महमूदाबाद को मिलाकर हरदा का गठन हुआ था। 1742 में मराठा पेशवा बालाजी बाजीराव के नेतृत्व में इस क्षेत्र पर मराठों ने कब्जा कर लिया था। बाद में यह क्षेत्र सिंधिया रियासत का हिस्सा बना और पिंडारियों व कोरकू आदिवासियों के हमलों का गवाह बना। इसका इतिहास यहीं खत्म नहीं होता। सन 1817 में तीसरे आंग्ल-मराठा युद्ध के बीच हरदा ब्रिटिश प्रशासन के अधीन आया। फिर क्या था ये जिला 1844 में अंग्रेजों को पूरी तरह सौंप दिया गया। 

 

परिवहन की बेहतर सुविधा

राजधानी भोपाल से 168 किमी दूर स्थित हरदा सड़क और रेल मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। अगर आप यहां आना चाहते हैं तक नजदीकी हवाई अड्डा भोपाल में है। जबकि इंदौर और जबलपुर एयरपोर्ट से भी यहां पहुंचा जा सकता है। जिले के तीनों ब्लॉक हरदा, खिरकिया और टिमरनी भी सड़क और रेल से जुड़े हैं। जिससे आप ट्रेन के माध्यम से भी यहां तक पहुंच सकते हैं।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि, हरदा न केवल अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के लिए बल्कि आदिवासी जीवन, हरियाली और धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी मध्य प्रदेश के एक अनमोल रत्न के रूप में उभर रहा है। यहां पर कई ऐसी जगह हैं जहां आप घूमने के लिए आ सकते हैं। 

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