हाइलाइट्स
- भोपाल में आंगनवाड़ी न्याय पदयात्रा रोकी गई
- 200 किमी पैदल यात्रा कर पहुंचे थे प्रदर्शनकारी
- आंगनवाड़ी-आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी दर्जा देने की मांग
- पुलिस ने सीएम निवास जाने से रोका
Anganwadi Workers Protest : भोपाल। भोपाल में आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर निकली पदयात्रा को पुलिस ने रोक दिया। छात्र नेता रामकुमार नागवंशी और उनके साथियों को बरकतुल्ला यूनिवर्सिटी के पास आगे बढ़ने से रोक दिया गया।
पुलिस ने उन्हें मुख्यमंत्री निवास की ओर जाने की अनुमति नहीं दी और पास के एक होटल के बाहर बैठा दिया।
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200 किलोमीटर की पदयात्रा का उद्देश्य
यह पदयात्रा 1 अप्रैल को बैतूल जिले के अंबेडकर चौक से शुरू हुई थी। “आंगनवाड़ी न्याय पदयात्रा” के नाम से शुरू इस अभियान का उद्देश्य सरकार तक कार्यकर्ताओं की मांगें पहुंचाना था।
करीब 200 किलोमीटर की दूरी तय कर 11 दिनों में भोपाल पहुंची इस यात्रा के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की गई।
सरकारी दर्जा और वेतन की मांग
रामकुमार नागवंशी का कहना है कि आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ता वर्षों से गांव-गांव में सेवाएं दे रही हैं, लेकिन उन्हें न तो सम्मानजनक वेतन मिलता है और न ही सरकारी कर्मचारी का दर्जा।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन लाखों महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई है।
परिवार से मिला आंदोलन का संकल्प
नागवंशी ने बताया कि उनकी भाभी और बहन खुद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। उनके संघर्ष को करीब से देखने के बाद ही उन्होंने यह पदयात्रा शुरू करने का निर्णय लिया।
उनका कहना है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाली इन महिलाओं को अब तक उचित पहचान नहीं मिल पाई है।
पुलिस पर आरोप, आगे नहीं जाने दिया
नागवंशी के मुताबिक, जब वे सुबह करीब 8:45 बजे भोपाल पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें रोक लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें मुख्यमंत्री निवास तक जाने नहीं दिया जा रहा और जबरन रोककर बैठा दिया गया है।
पुलिस ने उन्हें पदयात्रा समाप्त करने की भी समझाइश दी।
तपती गर्मी में जारी रहा संघर्ष
मध्य प्रदेश की तेज गर्मी और धूप के बावजूद नागवंशी लगातार पैदल चलते रहे। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
पदयात्रा का उद्देश्य मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपना था। नागवंशी को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी और आंगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं को उनका हक मिलेगा।